अतिपिछड़ों जिलों के विकास के लिए सीएसआर के तहत धन जुटाएगी सरकार

केंद्र सरकार द्वारा चिह्नित 117 सबसे पिछड़े जिलों की तरक्की के लिए सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) कोष जुटाने पर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन नीति आयोग और सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया था। इसमें हिस्सा लेने वाले विभिन्न सरकारी कंपनियों के 150 से अधिक प्रतिभागियों ने पिछड़े जिलों पर फोकस करने तथा उन जिलों में सीएसआर के बड़े हिस्‍से को लगाने के लिए एक विशिष्‍ट व्‍यवस्‍था करने पर विचार-विमर्श किया।

सार्वजनिक कंपनियों के अनेक अधिकारियों ने पिछड़े जिलों के जिला प्रशासन एवं राज्‍य के साथ भागीदारी में कार्य किये जाने को अपना समर्थन दिया ताकि स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर नतीजे सामने आ सके। यह भी तय हुआ कि सरकारी कंपनियाँ पिछड़े जिलों में की जाने वाली पहलों को अपनी ओर से समर्थन प्रदान करने के लिए केन्‍द्रीय प्रभारी पदाधिकारियों और जिलाधिकारियों दोनों के ही साथ मिलकर योजनाएं तैयार करेंगी।

पिछड़े जिलों में व्‍यापक बदलाव सुनिश्चित करना दरअसल राज्‍य सरकारों की भागीदारी के साथ भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसके तहत उन 117 पिछड़े जिलों में बड़ी तेजी से व्‍यापक बदलाव लाने के लिए संगठित प्रयास किये जा रहे हैं जिन्‍होंने स्‍वास्‍थ्‍य, पोषण, शिक्षा इत्‍यादि के क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम प्रगति की है। सम्‍मेलन का विषय पिछड़े जिलों की विशि‍ष्‍ट आवश्‍यकताओं के अनुसार सार्वजनिक कंपनियों के सीएसआर कोष का कारगर उपयोग सुनिश्चित करना था। इन उद्यमों का सालाना सीएसआर 3,200 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा कि अपनी युवा आबादी से लाभ उठाने के लिए भारत को मानव विकास सूचकांक से जुड़े अपने नतीजों को बेहतर करना चाहिये। उन्होंने सार्वजनिक कंपनियों के अधिकारियों को अपने प्रयासों को पिछड़े जिलों, विशेषकर स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण और शिक्षा के विषयगत क्षेत्रों पर केन्द्रित करने के लिए प्रोत्‍साहित किया।

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