अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए आर्यों ने लिखे झूठे और मनगढ़त धर्मशास्त्र

मनु ने पुनर्जन्म के सिद्धांत की रचना की और सभी मूलनिवासियों को जिन्हें आर्यों ने अछूत बनाया था को कमजोर, अछूत और गुलाम बनाए रखने के लिए वर्ण व्यवस्था को जाति व्यवस्था में बदल दिया.caste

जीतेंद्र सिंह

इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आर्यों ने समय-समय पर झूठे और आधारहीन धर्मंशास्त्र लिखें. इन धर्मशास्त्रों का उद्देश्य मूलनिवासियों पर अपना वर्चस्व कायम करना था. इसलिए उन्होंने मूलनिवासियों को सबसे से पहले निचले वर्णों में रखा. इसके बाद उन वर्णों को और कमजोर बनाने के लिए उन्हें सैकड़ों जातियों में बांटा डाला. जातियों में बांटने के लिए उन्होंने पेशे और उनके कर्मों को आधार बनाया.

मुगलों के आगमन के पहले तक वे कभी खुद को हिंदू नहीं कहते थे. लेकिन अपनी शक्ति को बनाये रखने के लिए खुद को हिंदू कहने लगे. दर असल आर्य भारत में मुग़लों के आने के बाद अपने आपको हिन्दू कहने लगे थे ताकि इससे उनके भारतीय मूलनिवासी होने का बोध हो.

इस तरह भारत में जाति पैदा करने का श्रेय वर्तमान हिन्दुओं के पुरखों को जाता है.

मनु की जाति व्यवस्था में जातियों की जनन क्षमता इतनी अधिक है कि आज जातियों की संख्या हजारों में पहुँच गई है और जाति का यह रोग भारत की सीमाएं लांघकर अमेरिका और ब्रिटेन तक पहुँच गया है, जातिगत संरचना के विकराल दंश से सभी घायल हो रहे है , समाज को तोड़ने के लिए क्या हम सभी जिम्मेदार है? नहीं. दर असल भारत में जातिवव्यवस्था का निर्माण आर्यों ने ही किया और आज जातिव्यवस्था और वर्णव्यवस्था जिस घिनावने रूप में हमारे पास मौजूद है उसका जिम्मेदार खुद को हिंदू कहने वाले आर्य नस्ल के ही लोग हैं.

 

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लेखक एक्सएलआरआई ग्रेजुएट जीतेंद्र सिंह एक सधे व्यवसायी हैं जो अनेक उद्यम स्थापित कर चुके हैं और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के अनेक प्रोजेक्ट का संचाल करते हैं. वह समाजसेवा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं. उनसे Jsinghxlri@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है

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