अब आया टेलिमेडिसीन का ज़माना

डिस्टांस एजुकेशन से शिक्षा हासिल करने की तरह अब टेलिमेडिसीन प्रोग्राम द्वारा इलाज की सुविधा भी शुरू हो गयी है.यह प्रोग्राम एम्स ने शुरू किया है.

ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज रायपुर और सीआरपीएफ ने मिल कर जवानो के साथ साथ आम लोगों के लिए टेलि मेडिसीन प्रोग्राम शुरू किया है. फिलहाल यह प्रोग्राम छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित जिलों में लागू किया गया है. इस प्रोग्राम के तहत हाईस्पीड इंटरनेट के सहारे सीआरपीएफ के जवान और अधिकारी स्काइप पर आ कर डाक्टरों से सम्पर्क करेंगे. विडियो कांफ्रेसिंग के सहारे मरीज अपनी बीमारी क बारे में बात करेंगे और उसी आधार पर डॉक्टर उन्हें सलाह और दवायें बतायेंगे.

एम्स के निदेशक नितिन एम नगराकर ने रायपुर में इस प्रोग्रामके उद्घाटन के बाद पत्रकारों को बताया कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य दूर दराज के इलाकों के लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध कराना है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार एम्स की यह सेवा विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम स्काइप के द्वारा सप्ताह में दो बार सीआरपीएफ के कैम्प से जुड़ेगी और मरीजों को सलाह और उपचार बतायेगी.

दूर दराज इलाकों में तैनात सीआरपीएफ के जवानों में तनाव और डिप्रेशन के चलते आत्महत्या के बढ़ते चलन को देखते हुए इस सुविधा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

टेलिमेडिसीन का चलन पश्चिम के कुछ देशों में पहले से है. बल्कि युरोप और अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में टेलिमेडिसीन की बाजाब्ता पढ़ाई भी होती है. कंसास विश्वविद्यालय ने टेलिमेडिसीन एंड टेलिहेल्थ के कोर्स की शुरूआत 1991 में की थी.

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