अब ग्रामीण विकास की बनेंगी वैज्ञानिक योजनाएं

ग्रामीण विकास विभाग सिस्टेमैटिक, प्लांड डेवलपमेंट की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए विभाग द्वारा हार्वर्ड विश्वविद्यालय केएक महती कार्यक्रम बीसीयूआरई को विभागीय कार्यक्रमों/योजनाओं में लागू करने के उद्देश्य से समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा तथा सतीश रंजन सिन्हा ( कंसल्टेंट) की उपस्थिति में सचिव ग्रामीण विकास एसएमराजू तथा  कंट्री मैनेजर डॉ चैरिटी मोर ने संगत दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

 

इस मौके पर पटना पर आयोजित एक कार्यक्रम श्री मिश्र ने बताया कि अभी तक अर्बन डेवलपमेंट की प्लानिंग की बातें हमलोग सुनते थे, लेकिन अब जरूरी है कि ग्रामीण विकास के लिए वेल प्लांड अप्रोच हो। उसी सिलसिले में यह एकरारनामा हमें आगे ले जायेगा। मंत्री ने बताया कि इसके तहत ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से जुड़े सभी निर्णय लेने वाले हितधारियों के उपयोग हेतु मनरेगा तथा इंदिरा आवास योजना का सरल डैश बोर्ड तैयार किया जायेगा ताकि इन कार्यक्रमों का हर स्तर के पदाधिकारियों द्वारा अपने निर्णय क्षेत्र के अनुसार त्वरित विश्लेषण कर कारगर अनुश्रवण किया जा सके

 

उन्होंने आगे बताया कि इसका उद्देश्य निर्णय लेने में होने वाले विलंब को कम करना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, तथा हरेक स्तर पर निर्णय में क्षमतावर्द्धन एवं सहभागिता वर्द्धन है ताकि योजनाओं का सरल कार्यान्वयन हो सके। इस मौके पर रिसर्च एसोसिएट  नीतेश कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत तथा पाकिस्तान में पूर्व से संचालित है। इस बीच नई दिल्ली से नया टाइ-अप हुआ है कि मनरेगा के जो भी आँकड़े हैं, उसके फैक्ट्स तथा फिगर्स को तार्किक-विश्लेषणात्मक ढंग से विजुअल स्वरूप में इसके लाभुकों, स्टेकहोल्डर्स के समक्ष पेश किए जायेंगे ताकि लोग इस योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए समुत्सुक हों। श्री नीतेश ने बताया दी कि बिहार सरकार द्वारा मनरेगा कार्यक्रम में पूर्व से डाटा है, रैंकिंग सिस्टम भी जारी है लेकिन अब इस पर रिसर्च तथा मॉनिटरिंग के जरिए तुलनातमक अध्‍ययन कर जो विजुअल डाटा दिया जायेगा, वह इस कार्यक्रम की सफलता के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।

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