अब रार पर विराम, सौदे को सलाम

15वीं विधान सभा की उल्‍टी गिनती शुरू हो गयी। इसके कार्यकाल में 10-12 दिनों की कटौती भी हो सकती है। नीतीश सरकार की जगह नयी सरकार का गठन निर्धारित समय से पहले भी हो सकता है। लेकिन नयी सरकार के गठन की व्‍यावहारिक प्रक्रिया अब जमीनी पर दिखेगी।download

नौकरशाही ब्‍यूरो  

 

विधान सभा चुनाव भाजपा गठबंधन और लालू गठबंधन के बीच लड़ा जाएगा। इसके अलावा कई छोटे-छोटे गठबंधन व कोन हो सकते हैं। चुनाव भले ही दोनों गठबंधनों के बीच लड़ा जाएगा, लेकिन गठबंधनों की अंदर की लड़ाई कम जटिल और आत्‍मघाती नहीं है। लालू गठबंधन के तीनों दल ने सीटों का आपसी बंटवारा कर लिया है। संभव है कि तीन अतिरिक्‍त सीट लालू यादव के राजद को मिल जाए या तीनों राजद, जदयू व कांग्रेस एक-एक सीट बांट लें। इसमें सीटों के चयन को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है और इसमें विवाद की गुंजाइश बरकरार है। नीतीश कुमार को अपनी सीटिंग विधायकों के अलावा शायद की नयी सीट मिले। लेकिन राजद व कांग्रेस बीच सीटों पर घमासान हो सकता है।

 

एनडीए में मतभेद

लेकिन एनडीए की लड़ाई अभी कई मोर्चों पर जारी है। अभी तक चारों दलों में सीटों को लेकर सहमति नहीं बनी है। संख्‍या के बाद ही सीटों के नाम पर सहमति बनेगी। इस बीच रामविलास पासवान व जीतनराम मांझी की पार्टी की आपस में उलझ रही है। लेकिन जमीनी वस्‍तुस्थिति से सभी वाकिफ हैं। सीटों की संख्‍या पर रार दो-एक दिनों में निपट जाने की संभावना है। इसके साथ ही नामों का मामला भी सुलझ सकता है।

 

तकरार को राम-राम

दोनों गठबंधनों में कोई भी पार्टी तकरार करने को तैयार नहीं है। तय है कि एनडीए में भाजपा की इच्‍छा सर्वोपरि होगी और दूसरे गठबंधन में लालू यादव की बात सुनी जाएगी। अब बहस की कोई गुंजाइश नहीं है। हर पक्ष अब रार पर विराम लगाकर सीटों पर सौदेबाजी करना चाहेगा, क्‍योंकि कोई भी विवाद गठबंधन को कमजोर करेगा। लेकिन सौदेबाजी भी दबाव से आगे नहीं बढ़ पाएगी।

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