अशफाक ने चेताया कि शरियत के बहाने मुसलमानों को भड़का कर यूपी चुनाव जीतना चाहती है भाजपा

तलाक से जुड़े कानूनी विवाद को केंद्र सरकार की संघी साजिश साजिश करार देते हुए  जनता दल राष्ट्रवादी ने मुसलमानों से अपील की है कि वे टकराव के बजाये सूझ-बूझ की रणनीति अपना कर उसका मुकाबला करें.photo12

जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय कंवेनर अशफाक रहमान ने कहा है कि तलाक और निकाह की आड़ में केंद्र सरकार समान नागरिंक संहिता लागू करने का मंसूबा बना रही है. ऐसे में मुसलमानों को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाये अपने पक्ष को मजबूत करने में लग जाना चाहिए.

 

रहमान ने याद दिलाया कि मोदी सरकार उत्तप्रदेश में चुनाव के मद्देनजर मुसलमानों के बीच टकराव का महौल बनाने में लग गयी है. उन्होंने कहा कि हमें उनकी साजिशों का शिकार नहीं होना है. उन्होंने कहा कि आज मुस्लिम सियासत फिर परीक्षा के दौर से गुजर रही है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम संगठनों को अदालती लड़ाई के बजाये मुसलमानों के अंदर शरियत कानून के प्रति जागरूकता फैलाना चाहिए. अशफाक रहमान ने अपने बयान में कहा कि शरियत कानून से जुड़े मसले का समधान किसी भी हाल में अदालत में नहीं हो कता.

पर्सनल ला बोर्ड पर भरोसे की जरूरत

अशफाक रहमान ने कहा कि मुस्लिम सामाजिक और मजहबी संगठनों को चाहिए कि वे सम्मिलित रूप से यह प्रयास करें जिसमें मुसलमानों को समझाया जा सके कि शरियत कानून विशुद्ध रूप से मुसलमानों का  अंदरूनी मला है और इससे जुड़ी समस्याओं का समाधान शरियत के अंदर है  न कि अदालतों के पास. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को यह बताने की जरूरत है कि शरियत से जुड़े मसले का समधान शरियत के आधार पर ही हो सकता है. इसलिए इस मामले में अदालत की भूमिका गैरइस्लामी होगी और इस पर भी अगर कुछ लोग अदालत में जाना चाहें तो उन्हें यह बताया जाना चाहिए कि यह गैरइस्लामी तरीका है और वे अगर गैर इस्लामी तरीका अपनाना चाहें तो वे अदालत में जा सकते हैं.

 

अशफाक रहमान ने कहा कि दर असल कुछ लोग शरियत के मामले को अदालत में घसीटना चाहते हैं. उनका कहना है कि केंद्र सरकार शरियत कानून को  समान नागिरक संहिता के दायरे में लाने की साजिश कर रही है. उन्होंने कहा कि यह संघ और भाजपा का एजेंडा है . भाजपा चूंकि हर हाल में उत्तर प्रदेश चुनाव जीतना चाहती है इसलिए वह मुसलमानों की भावनाओं को भड़का रही है. ताकि मुसलमान सड़कों पर उतर आयें और इसका फायदा वह हिंदू वोटों की गोलबंदी के रूप में उठाये. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को शरियत का मामला मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के हवाले कर देना चाहिए .

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