‘आईआरसीटीसी के शोषण के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ेंगे’

रेल मंत्रालय के पीएसयू मिनिरत्न आईआरसीटीसी के ई-टिकट यूनिट आईटी सेंटर, नई दिल्ली में 125 कथित आउटसोर्स/कॉन्ट्रैक्ट वर्कर के दल ने आईआरसीटीसी प्रबंधन और भारत सरकार से ठेका कानून के तहत समान काम का समान वेतन की लिखित मांग की थी। मगर शांतिपूर्ण और लिखित अपील से दुखी होकर आईआरसीटीसी प्रबंधन ने संगठन के नेतृत्व करने वाले सुरजीत श्यामल को 17 अक्टूबर 2013 को सेवा खराब का बहाना कर गैर कानूनी तरीके से बर्खास्त कर दिया था। जबकि बेहतर सेवा के लिए सुरजीत को उसी वर्ष एमडी, आईआरसीटीसी द्वारा बेस्ट एग्जीक्यूटिव अवार्ड से सम्मानित किया था। जिसके लिए अभी लेबर कोर्ट में केस विचाराधीन है।20160724_113729

 

श्यामल ने इसके बाद पुरे देश के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर के लिए आवाज उठाते हुए समान काम का समान वेतन को लागू करवाने के लिए माननीय दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका संख्या 2175ध्2014 दायर की। सुरजीत श्यामल के वकील राकेश कुमार सिंह ने उनका पक्ष रखते हुए कहा कि इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में सरकारी विभागों के 1 करोड़ 25 लाख स्थाई पोस्ट पर 69 लाख ठेके पर काम करते हैं और अगर निजी विभागों को जोड़कर देखें तो आंकड़ा चैकाने वाला हो सकता है।

समान काम, समान वेतन लागू हो

ठेका कानून 1970 में ही समान काम का समान वेतन का प्रावधान है तो पिछले 44 वर्षों से इसको लागू क्यों नही किया गया। जिसकी सुनवाई करते हुए माननीय कोर्ट ने 4 अप्रैल 2014 को आईआरसीटीसी, उसके ठेकेदार, भारत सरकार व् अन्य प्रतिवादियों से जबाब देने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद आईआरसीटीसी के कर्मचारियों ने यूनियन के द्वारा दिल्ली से कलकत्ता और मुम्बई तक निरन्तर आंदोलन चलाकर प्रबंधन के नाक में दम कर दिया। सड़क से संसद् और शोसल मीडिया में अभियान छेड़ दिया। इसमें कुछ लोगों को अपनी नौकरी भी कुर्बान करनी पड़ी।

 

मगर इस अचानक के बदलाव से मैनेजमेंट घबरा गई और तो और आखिर कोर्ट में जो भी पेपर और तथ्य पेश किये उससे मैनेजमेंट की हार तय थी। दूसरी तरफ वर्कर संगठन के साथ साहस दिखाते हुए मैनेजमेंट का विरोध करते रहें। यहाँ तक की मैनेजमेंट ने कुछ वर्कर्स को प्रताड़ित भी किया और तो और आईटी सेंटर दिल्ली के कस्टमर केयर सेंटर की महिला कर्मियों का सुबह 10 से 12 बाथरूम जाने पर रोक तक लगा दिया। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले वर्कर्स को अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी। फिर भी वर्कर्स अपने सीटू संबंद्ध यूनियन का झन्डा लेकर आईटी सेंटर के गेट पर ऐतिहासिक 70 दिनों तक धरना पर डटे रहें। जिससे की मैनेजमेंट के हौसले पस्त हो गये। इस आंदोलन को आड़े हाथों लेकर कामरेड तपन सेन, राष्ट्रीय महासचिव व् सांसद सीटू ने आईआरसीटीसी के वर्कर्स के ऊपर हो रहे शोसन को पार्लियामेंट स्टेंडिंग कमेटी आॅफ लेबर के आगे उठाया। जिसमे उन्होंने बताया कि किस तरह से आईआरसीटीसी पिछले 2005 से 2014 तक कॉन्ट्रैक्ट लेबर( रेगुलुशन एंड ऑब्लिशन) एक्ट 1970 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन व् इसके ठेकेदार बिना लाइसेंस के लगातार वर्कर्स से स्थाई प्रकृति के लिए काम ले रहे हैं। कानूनी हक की मांग करने वाले वर्करों को ईनाम देने के बजाय नौकरी से निकाल दिया और उनके साथियों को प्रताड़ित किया जाता है। स्टैंडिंग कमेटी ने मामले के गंभीरता को आड़े हाथों लिया और आईआरसीटीसी के एक-एक यूनिट का इंस्पेक्शन करवा लिया। इस तरह चैतरफा दबाब के कारण आईआरसीटीसी प्रबंधकों ने वर्करों की मांग के आगे झुकना पड़ा।

 

मैनेजमेंट की हालत

अभी मैनेजमेंट ने चैथी मांग मानते हुए कॉन्ट्रैक्ट  कर्मचारियों के लिए समान काम का समान वेतन चुपचाप लागू कर दिया है। अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को 25-30 हजार रूपये प्रति माह देने का सर्कुलर बनाया है। मगर इसमें भी चालाकी करते हुए मैनेजमेंट ने केवल अब नये न्युक्त होने वाले वर्कर के लिए ही अभी लागू किया है। अभी आईटी सेंटर, नई दिल्ली में अपने सगे संबंधियों के रूप में कुछ नये कॉन्ट्रैक्ट वर्कर (नये ठेकेदार के माध्यम) 30 हजार प्रति माह पर रखे गये हैं। मगर जो पुराने और अनुभवी वर्कर है वो चुप-चाप अभी भी उसी पुराने सैलरी में काम कर रहे हैं।

नाइंसाफी

आईआरसीटीसी वर्कर के नेता श्री सुरजीत श्यामल का कहना है कि यह तो हमारे साथियों के साथ सरासर नाइंसाफी और धोखा है। अगर समान काम का समान वेतन का सर्कुलर बना है तो सबके लिए लागू होना चाहिए और कानून के अनुसार योग्यता व अनुभव के आधार पर सभी वर्कर मिलना चाहिए। अगर आईआरसीटीसी प्रबंधन जल्द से जल्द ऐसा नही करती है तो हमारी यूनियन इसके खिलाफ आंदोलन तेज करेगी। हम अंतिम सांस तक इस शोषन व असमानता के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगें। अगर हमारे गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गये 99 वर्कर्स को वापस नही लेती है तो इसका खातियाजा भुगतना होगा। आगे श्री श्यामल ने पूरे भारत के ठेका कर्मियों से अपील की है कि आप यूनियन बनाकर आवाज उठायें। आपलोगों की संख्या पूरे देश में करोड़ों में है और अगर एकता के साथ संधर्ष रास्ता चुनते हैं तो कोई भी सरकार आपको हमको अनदेखी नही कर पायेगी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*