आखिरकार भाजपा नेताओं ने ही मंगल पांडेय की दी ‘शरण’

बिहार विधान सभा सचिव के कक्ष में विधान परिषद के लिए नवनिर्वाचित सदस्‍यों के प्रमाणपत्र सौंपे जाने का जश्‍न खत्‍म ही हुआ था कि हम कुछ ‘विजेता उम्‍मीदवारों’ के साथ अध्‍यक्ष विजय कुमार चौधरी के चैंबर में पहुंचे। आमतौर पर परंपरा रही है कि विधान सभा कोटे से निर्वाचित विधान परिषद सदस्‍य स्‍पीकर से शिष्‍टाचार मुलाकात करते हैं। इसी सिलसिले में जदयू के प्रदेश अध्‍यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह, सुशील कुमार मोदी, मंगल पांडेय, रामचंद्र पूर्वे, रामेश्‍वर महतो, संजय पासवान आदि स्‍पीकर से मुलाकात करने पहुंचे। वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने ही मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का प्रमाणपत्र लिया था।

 वीरेंद्र यादव, विधान सभा से 

इस दौरान चर्चा हुई कि विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान कब हुआ था। इसमें एक बात सामने आयी कि जिस समय गिरिराज सिंह पहली बार विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए थे, उसी साल मतदान की नौबत आयी थी। इसके बाद मतदान की नौबत नहीं आयी। थोड़ी देर में सभी स्‍पीकर के प्रति आभार जताकर बाहर निकलने लगे। हम भी वहां से बाहर परिसर में आये। बाहर नवनिर्वाचित संजय पासवान से मुलाकात हो गयी। हमने पूछा कि ‘आप भगवा पार्टी के उम्‍मीदवार हैं और ‘पिअरका’ गमछी लेकर घूम रहे हैं।’ इस पर उन्‍होंने कहा कि ‘हमारा भगवा यही है। राह बाबा की गमछी है। आग पर चलने वाले राह बाबा की।’

इससे पहले करीब 3 बजे हम विधान सभा सचिव के चैंबर में जगह ‘हथिया’ लिये थे। प्रमाणपत्र ग्रहण करने पहुंचने वालों में संतोष सुमन, प्रेमचंद मिश्र, संजय पासवान, रामचंद्र पूर्वे, रामेश्‍वर महतो, खालिद अनवर पहली पंक्ति की कुर्सी पर बैठे थे। राबड़ी देवी के प्रमाणपत्र लेने के लिए भोला यादव भी पहुंच चुके थे। जदयू वाले ‘कुर्सी लूट’ जाने की पीड़ा से वाकिफ हैं। इसलिए वशिष्‍ठ नारायण सिंह के लिए श्रवण कुमार पहले से कुर्सी ‘लूटकर’ बैठे हुए थे। वशिष्‍ठ बाबू के पहुंचते ही श्रवण कुमार ने कुर्सी ‘दादा’ को सौंप दी।

कुर्सी कब्‍जाने में सुशील मोदी और मंगल पांडेय पिछड़ गये। जब तक वे पहुंचे, कुर्सी पर लोग लद चुके थे। सुशील मोदी के लिए जदयू के रामेश्‍वर महतो ने अपनी कुर्सी छोड़ दी, जबकि मंगल पांडेय को दूसरी पंक्ति में बैठे भाजपा नेताओं ने ‘शरण’ दी। कुर्सी छोड़ने के बाद रामेश्‍वर महतो को कुर्सी सिर्फ हस्‍ताक्षर करने भर को नसीब हुई। उन्‍होंने प्रमाणपत्र लेने के बाद कक्ष से बाहर निकलने में ही अपनी भलाई समझी। इसी बीच राजद के खुर्शीद मोहसिन पहुंचे। उनके लिए भी कुर्सी की व्‍यवस्‍था पिछली पंक्ति में की गयी। मंगल पांडेय को हस्‍ताक्षर करने के लिए कुर्सी की जरूरत पड़ी तो खालिद अनवर को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी। वह भी कुर्सी को ‘प्रणाम’ कर बाहर निकल लिये। करीब 40 मिनट तक सचिव के चैंबर में पत्रकार और नवनिर्वाचित परिषद सदस्‍य जगह के लिए मशक्‍कत करते रहे।

नवनिर्वाचित सदस्‍यों के नाम पुकारने और पढ़ने में सचिव रामश्रेष्‍ठ राय ने दो जगहों पर गलती कर दी, जिसे उन्‍होंने बाद में सुधारा। सचिव ने सुशील मोदी को राजद का और रामचंद्र पूर्वे को जदयू को प्रत्‍याशी बताया। इस पर ठहाके भी लगे। इस कार्यक्रम के दौरान दोनों बनिया सुशील मोदी और रामचंद्र पूर्वे अगल-बगल में बैठे बातचीत में मशगूल रहे। दोनों ब्राह्मण मंगल पांडेय और प्रेमचंद्र मिश्र अलग-अलग छोर पर नजर आये, जबकि दोनों ‘महादलित’ संतोष सुमन और संजय पासवान आपस में बातचीत भी नहीं कर पाये। राबड़ी देवी के प्रतिनिधि के रूप में भोला यादव और नीतीश कुमार के प्रतिनिधि के रूप में वशिष्‍ठ नारायण सिंह ने प्रमाणपत्र ग्रहण किया। विधानसभा परिसर में जश्‍न और जयकारा था। फिर धीरे-धीरे विजेता समर्थकों के साथ छंटने लगे।

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