आजादी की लड़ाई में मो. युनूस का योगदान भुलाया नहीं जा सकता

बिहार  प्रांत  के प्रथम प्रधानमंत्री, प्रख्यात समाज सेवी मोहम्मद युनूस की जयंती आज राजकीय समारोह रूप में मनाया गया। इस मौके पर उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव ने उनके चित्र पर मार्ल्‍यापण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उपमुख्‍यमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में युनूस साहब का योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

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जयंती पर दी गयी श्रद्धांजलि

 

कार्यक्रम में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्‍य कुलवंत सिंघ सलूजा, समाज बचाओ आंदोलन के काशिफ युनूस, सामाजिक कार्यकर्ता  चन्देश्‍वर प्रसाद  सिंह, भाई अरुण, सत्येन्द्र पासवान, मुकेश सिंह आदि ने भी उनके तस्‍वीर पर मार्ल्‍यापण श्रद्धांजलि अर्पित की।

1937 में बने थे बिहार के प्रधानमंत्री   

बैरिस्टर साहब का जन्म 4 मई 1884 को पटना के नौबतपुर के निकट पनहरा में हुआ था। उन्होंने लंदन से 1906 में बैरिस्टरी की डिग्री ली। इसके बाद बिहार वापस आये और फिर वहां से कलकत्ता हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। इस दौरान वह कांग्रेस से जुडे़, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं के असहयोग की नीति के कारण वह सचिच्दानंद सिन्हा और सर अली इमाम की तरह कांग्रेस अलग हो गये। मौलाना सज्जाद के साथ मिल कर मुस्लिम इंडिपेंडेंट पार्टी बनायी। इसी पार्टी के विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद वह 1937 में बिहार के प्रधान मंत्री बने। एक अप्रैल 1937 को वह बिहार के प्रिमियर बने और इस पद पर लगभग चार महीने यानी 19 जुलाई 1937 तक रहे। इससे पहले वह 1916 में इम्पेरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य चुने गये। फिर 1921 में बिहार-उडिसा काउंसिल के मेम्बर चुने गये। फिर 1932 में बिहार काउंसिल के सदस्य चुने गये और 1936 तक इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

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