‘आतंकवाद के नाम पर फर्जी मुठभेड़ों की बढ़ी आशंका’

देश का खुफिया तंत्र आतंकवाद के नाम पर दहशतगर्दी फैला कर मानसिक दोहन की रणनीति पर काम कर रहा है और रिहाई मंच इसका हर स्‍तर पर विरोध करेगा। रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्‍मद शुऐब ने लखनऊ में कहा कि पिछले दिनों नोएडा में आतंकवाद के आरोप में दो नौजवानों को गिरफ्तार किया।terror

 परवेज आलम, लखनऊ से

यह खुफिया तंत्र की सोची समझी रणनीति का हिस्‍सा है। उन्‍होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और अजीत डोभाल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद से ही तय हो गया था कि एक बार फिर से 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के दौरान आतंकवाद के नाम पर फर्जी मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों का दौर शुरू होगा। उन्‍होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के बर्धवान धमाकों के पीछे एनआईए और संघ परिवार का हाथ है। इसकी पुष्टि मीडिया और खुफिया रिपोर्टों में हुई है।

रिहाई मंच आजमगढ़ के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि आधिकारिक स्‍तर मीडिया के माध्‍यम से गलत सूचनाएं दी जाती हैं और देश को गुमराह किया जाता है।  उन्‍होंने कहा कि आंतकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमान युवकों के फंसाया जाता है या इनकाउंटर कर दिया जाता है।

रिहाई मंच के नेता अनिल यादव ने कहा कि फर्जी गिरफ्तारी के खेल में उत्तर प्रदेश की सपा सरकार भी शामिल है। जबकि वह इसी वादे के साथ सत्ता में आई थी कि वह आतंकवाद के नाम पर बंद बेगुनाह नौजवानों को रिहा कर देगी।

रिहाई मंच के नेता हरेराम मिश्र ने कहा गणतंत्र दिवस पर ओबामा के भारत आने के समय खुफिया विभाग द्वारा किसी बड़े आतंकी धमाके के अंजाम दिए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता। उल्‍लेखनीय है कि रिहाई मंच गलत तरीके से फंसाये गए युवकों को न्‍याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहा है। वह उनकी रिहाई के लिए अभियान चला रहा है और उन्‍हें कानूनी परामर्श और सहयोग भी दे रहा है।

 

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