‘आदरणीय नीतीशजी व शरदजी का तहे दिल से शुक्रगुजार हूं’

नौकरशाही डॉट इन से हुई बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साक्षात्कार में अब तक आप उनके साथ हुए शोषण और जीवन के पहलुओं पर बातचीत पढ चुके हैं. आखिरी किस्त में पढें राजनीति और विकास की बात-

मुख्यमंत्री: प्राथमिकता तो पहले से तय है

मुख्यमंत्री: प्राथमिकता तो पहले से तय है

ऋशाली यादव 

आप बिहार के मुख्यमंत्री बन गये हैं इसका श्रेय किसे देना चाहेंगे ?

निश्चित ही इसका श्रेय नीतीश कुमार जी और पार्टी  अध्क्ष शरद यादव जी को देना चाहूंगा।  और उनका तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ अपना विश्वास मुझमे दिखाने के लिए।  दोनों ने मिलकर पार्टी के सभी सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर सम्मिलित निर्णय लिया और मेरा नाम प्रपोज़ किया, जिसके परिणाम स्वरुप मैं आज सीएम के पद पर बैठकर राज्य का कार्यभार संभल रहा हूँ।

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राज्य की  की तरक्की के लिए आपकी अपनी क्या योजनाएं’हैं ?

किसी  भी राज्य या देश की उन्नति केवल एक व्यक्ति विशेष के वज़ह से नहीं होती है।  सरकार और संगठन के लोगों के सहयोग से काम होता है। पार्टी सभी सदस्यों की सहमति से ही हम हर  काम को अंजाम  देते हैं।  मेरी कोशिश यही है कि जो भी योजनायें लागूं हो चुकी हैं उन्हें मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाये. समाज के हर तबके के विकास के लिए हम प्रय्तनशील हैं. हम आगे कई फैसले लेंगे.

 बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के नीतीश जी के इस काम को आप किस प्रकार आगे लेकर जायेंगे ?

निश्चित रूप से ये हमारे लिए एक बहुत बड़ा टास्क है।  और ये न तो सिर्फ़ मेरी बात है, न ही नीतीश  जी का मामला है, ये  बिहार के दस करोड़ लोगों की मांग है. सवा करोड़ लोगों ने तो केंद्र सरकार को इस डिमांड पर दस्तखत करके भेजा है.  इसलिए मैं विशेष रूप से मोदी जी से मिल कर इस पर विचार विमर्श  करूँगा।  सी एम पद संभालने के बाद जब मोदीजी ने हमें बधाई दी तो मैंने उनसे कहा है कि बिहार पर उनका विशेष रूप से ध्यान होना चाहिए.

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आरजेडी ने हमें आपने अनकंडिशनल सपोर्ट दिया है, ये स्पष्ट तौर पर एक राजनैतिक कदम है।  महा दलित समाज से पहला मुख्यमंत्री बनने के कारण अगर वह विरोध  करते तो समाज में उनकी एक गलत धरना बनती। मुझे ऐसा लगता है ये सपोर्ट उस धारणा से बचने क लिए है। और जहाँ तक हमारे उसे स्वीकार करने की बात है, तो हमने उनसे सपोर्ट मांगा नहीं था. साम्प्रदायिकता के खिलाफ वह हमारे साथ आये तो हम उन्हें दरकिनार तो नहीं कर सकते.

बिहार के लिए आगे की क्या स्ट्रैटजी है ?

बिहार निरंतर रूप से आगे बढ़ रहा है।  बिहार में हुए तरक्क़ी की सराहना  अमर्त्य सेन , एपीजे अब्दुल कलाम साहब , बाराक  ओबामा जैसे प्रसिद्ध वयक्तियों ने भी की है। तो हमारे लिए स्ट्रैटजी कोई नई नहीं हैं। हमारी कार्ययोजना तो पहले से ही बानी हुई है और उसे ही कारगर ढंग से आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। मुझे पूरा यक़ीन है की हम ऐसा कर देंगे कि बिहार की गिनती पूरे हिंदुस्तान में अग्रणी राज्यों में होगी।

  राज्य में वर्ष 2014-2015 तक  करीब  5 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण होना है, इससे आप कैसे पूरा करेंगे ? इससे जुड़ी क्या कठिनाइयां है आपके सामने ?

 

ये टारगेट हमारा लक्ष्य है कि बिहार की कोई भी ऐसी बसावट जहा 200 से ज्यादा की संख्या हो, वह सड़क के बिना न रहे।  हमारी कार्य योजना इस प्रगति के लिए तैयार है और कई फेज में इसका काम चलेगा।

जहाँ  तक कठिनाइयों की बात है, रूपए की कमी हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए हमने विश्व बैंक से लोन के लिए भी अप्लाई किया है। और अगर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलता है तो इसमे मिले पैकेज से भी कई ऐसे समस्याओं का समाधान हो सकता है।

 सड़क निर्माण में अगर हम सेमी अर्बन जगहों की बात करें  तो, कुछ  जगहों पर कार्य कई वर्षों  से पूरे नहीं हुए है. कई जगह भ्रष्टाचार की खबरें भी आयी हैं इसके लिए आप क्या कदम उठायेगे ?

देखिये हर काम को करने का एक तरीका होता है और पूरा होने का निश्चित समय भी। कोई भी निर्माण वित्तीय नियम अनुसार संवेदक द्वारा पूरा होता है। अगर हमें किसी भी प्रकार की ऐसी सूचना मिलती है तो हम निश्चित रूप से कार्यवाही करते है। पता चलने पर ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाता है और अगर उससे भी बात न बने तो एफआईआर भी करते हैं , ताकि काम को समय पर  और पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा सके।

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