आपने भ्रष्ट सत्ता की चूलें हिलायीं आपको सलाम

अपनी सफाफ ऑडिट रिपोर्ट की बदौलत सत्ता और कार्पोरेट जगत की हस्तियों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लेने वाले विनोद राय 22 मई को रिटायर हो रहे हैं.

विनोद राय: जनिपे हमें नाज है

विनोद राय: जनिपे हमें नाज है

इर्शादुल हक

सुरेश कलमाड़ी, डी राजा और न जाने कितने ऐसी बड़ी हस्तियां जेल में चक्की पिस रही हैं यह सीएजी का ही कमाल है.

ये विनोद राय ही हैं जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम,कोलगेट मामला और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले को उजागर कर बड़े बड़े शोरमाओं को सलाखों के पीछे जाने को मजबूर कर दिया. अमूमन सत्ता के लालच और सरकार की नाराजगी से बचने के लिए नौकरशाह सत्ता के खिलाफ खामोश ही रहते हैं. पर विनोद राय ने उसी कांग्रेस के भ्रष्ट नेताओं को अपनी दबिश का शिकार बनाया जिसने उन्हें सीएजी के पद पर बिठाया था. विनोद राय ने यह जताने-मनवाने का काम किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थायें अहम होती हैं न कि व्यक्ति.

1972 बैच के आईएएस अधिकारी राय ने सीएजी को वैसी ही ऊंचायी बख्शीं जैसे कुछ साल पहले टीएन शेषण ने चुनाव आयोग की हैसियत का लोहा मनवाया था.
देश में घपले-घोटाले और लूट व हाहाकार के इस दौर में विनोद राय ने देश वासियों में एक उम्मीद की किरण पैदा की है, संस्थाओं में विश्वास रखने का जज्बा दिया है.

राय ने किसी की परवा किये बगैर अपना काम बखूबी अंजाम दिया है. पर राय को इस बात की अब भी चिंता है कि देश में लूट-खसोट की एक नयी संस्कृति विकसित की गयी है और उसे पकड़ने का अधिकार सीएजी को नहीं दिया गया. पिछले एक दो दशक से प्राइवेट-पब्लिक-पार्टनरशिप(पीपीपी) मोड में काम करने का चलन बढ़ा है पर सीएजी के दायरे में यह नहीं आता. नतीजतन अरबों-खरबों की लूट और वारे-न्यारे के बावजूद सीएजी मजबूर है.
अब उम्मीद की जानी चाहिए कि देश एक ऐसे अधिनियम को सामने लाये ताकि पीपीपी की लूट पर नजर रखी जा सके.

एक पूर्व सहयोगी के शब्दों में राय लालफीताशाही के टालू रवैये के बावजूद काम करवाने का जो हुनर जानते हैं वैसा गुण बिरले नौकरशाहों में ही पाया जाता है.
अब नये सीएजी शशिकांत शर्मा से देश को काफी उम्मीदें होंगी. बिहार कैडर के शशिकांत शर्मा देश की उम्मीदों पर कितने खरे उतरेंगें यह तो वक्त ही बतायेगा.

उत्तर प्रदेश के भूमिहार परिवार में जन्मे विनोद राय केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं औ अनेक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी भूमिका अदा कर चुके हैं.वह वित्तमंत्रालय के कई महत्वपूर्ण पदों के अलावा अनेक बैंकिंग समूहों के निदेशकमंडल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.वह केरल सरकार में वित्त विभाग के प्रधान सचिव भी रह चुके हैं.

विनोद राय के बार में अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह रिटायर होने के बाद राजनीतिक पारी की शुरूआत कर सकते हैं. हालांकि इस प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “यह तो समय ही बतायेगा कि क्या वह राजनीति में शामलि होंगे” . पर खबर है कि भाजपा और समाजवादी पार्टी लगातार उनसे सम्पर्क में हैं.

लेखक नौकरशाही डॉट इन के सम्पादक हैं

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