आलादीन के तिलिस्म की तरह निकले और छा गये

सांवला कद, पैंट के ऊपर लहराती हाफ शर्ट, पतली मगर तीखी आवाज, रुखरा चेहरा और भरी मूछों का यह आदमी नौकरशाह से मुख्यमंत्री बन जायेगा, किसी ने सोचा न था.KEJRIWAL

ऐसी शख्सियत, जिसकी सार्वजनिक जीवन में कोई पहचान नहीं पर अचानक दो साल के संघर्ष में देश की राजनीति में कोहराम मचाने वाला 45 साल का यह आम आदमी वह सब कुछ कर गया जो आलादीन की जादुई चिराग से निकले अजूबे की तरह अविश्वसनीय लगता है.

अरविंद केजरीवाल का जन्म 1968में हरियाणा ]के हिसार शहर में हुआ ] और उन्होंने 1989 में आईआईटी खड़गपुर से यांत्रिक अभियांत्रिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। बाद में, 1992 में वेभारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) ज्वाइन किया.

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वह दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियुक्त किये गये.। शीघ्र ही, उन्होंने महसूस किया कि सरकार में बहुप्रचलित भ्रष्टाचार के कारण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
दिल्ली में एक नागरिक आन्दोलन-परिवर्तन की स्थापना की, जो एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। इसके बाद, फरवरी 2006 में, उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया, और पूरे समय के लिए सिर्फ ‘परिवर्तन’ में ही काम करने लगे। अरुणा रॉय और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर, उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के लिए अभियान शुरू किया.

अरविंद ने हिसार से अपनी हाईस्कूल तक की पढ़ाई पूरी की। आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद केजरीवाल ने कुछ समय टाटा स्टील में नौकरी की। मात्र तीन साल में टाटा को बाय-बाय कह दिया.

आईआरएस सेवा के प्रशिक्षण के दौरान ही केजरीवाल ने अपनी बैचमेट सुनीता से विवाह किया। केजरीवाल के एक पुत्र और एक पुत्री है।

साल 2000 में केजरीवाल ने परिवर्तन नाम के एक एनजीओ की शुरुआत की और इसके माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकना शुरू कर दिया. परिवर्तन के जरिए उन्होंने देश भर में सूचना के अधिकार का अभियान चलाया. बाद में सूचना अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी फिर अरविंद की दुनिया बदलती चली गयी.

अरविंद को ‘राइट टू इन्फॉरमेशन’ पर काम के लिये एशिया का नोबल पुरस्कार कहा जाने वाला मैग्सेसे अवार्ड मिला। इस सम्मान को पाने के बाद अरविंद की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और तेज हो गयी. इसी क्रम में उनकी मुलाकात अन्ना से हुई और बाद की कहानियां तो पूरे देश और पूरी दुनिया को पता चलने लगीं.

26 नवंबर 2012 में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई। महज एक साल पहले पैदा हुई आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में काबिज कांग्रेस और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। आज अरविंद दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने वाले हैं.

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