आहत, मर्माहत और अकुलाहट में क्या-क्या बोले जा रहे हैं श्याम !

जब लालू के करीब थे तो राम और श्याम की एक जोड़ी का हिस्सा थे श्याम रजक. लालू का छाया और उनके जाननशीन यानी सब कुछ थे श्याम. वक्त बदला तो पहले श्याम ने लालू का हाथ झटका फिर राम( राम कृपाल)ने.

नौकरशाही ब्यूरो

लालू परिवार के सत्ता से बेदखल होते ही श्याम के करियर में राजनीतक बहार  आ गयी और उन्होंने नीतीश सरकार में मंत्री का पद ग्रहण कर लिया.

पर वक्त ने फिर करवट बदला. फिर नीतीश और लालू साथ आ गये और बिहार की बागडोर नीतीश कुमार को सौंपी गयी तो श्याम रजक की बाहरें पतझड़ में बदल गयीं. मंत्रिमंडल में तमाम लोगों को जगह मिली पर श्याम रजक का नाम उस सूची में नदारद था.

जद यू में श्याम आज एक कद्दावर नेता की हैसियत तो रखते हैं, पर मंत्रिमंडल का रोब जो नहीं तो फिर कुछ भी नहीं. सो आलम यह है कि  सीबीआई द्वारा एफआईआर में तेजस्वी का नाम डालने पर श्याम अपनी सारी खीज राजद प्रमुख पर उतार रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2015 में, लालू ने श्याम को मंत्रिमंडल में शामिल ना करने के लिए नीतीश को मनाया था. ऐसे में आहत व मर्माहत श्याम अगर लालू के खिलाफ कुछ कह रहे हैं तो उनकी खीज को लोग भी समझ रहे हैं.

हालांकि जद यू ने श्याम रजक के बयान को उनका निजी बयान बता कर मामले को ठंडा करने की कोशिश तो जरूर की है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शनिवार को लालू पर हमला बोला.  लालू पर हमला बोलते हुए उन्हें बुजुर्ग मानसिकता वाला व्यक्ति बताया.

रजक ने कहा कि लालू बुजुर्गियत में लगातार अनाप शनाप बयान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि JDU अपने स्टैंड से कभी भी पीछे नहीं हटा है और न ही हटेगा. जहां तक फैसले का सवाल है तो नीतीश सही समय पर ही सही फैसला लेंगे.

इससे पहले श्याम रजक ने 27 अगस्त को राजद की रैली में शामिल होने के संबंध में कहा था कि नीतीश कुमार को इस रैली में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं है. लेकिन उसी दिन नीतीश ने शाम को स्पष्ट किया था कि अगर उन्हें निमंत्रण मिला तो जरूर जायेंगे. इससे श्याम के चेहरे पर मायूसी आ गयी थी लेकिन सीबीआई प्रकरण में फिर से श्याम रजक ने अपनी डफली बजाना शुरू कर दिया. श्याम ने दो दिन पहले कहा था कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं करने वाले. उनके  इस बयान का मतलब था कि या तो तेजस्वी खुद इस्तीफा दें या फिर नीतीश उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें.

हालांकि दोनों दलों के बीच आपसी मनमुटाव शुक्रवार से लगातार कम होता जा रहा है.

 

 

About Editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*