इनके लिए रेत का महल साबित हुआ आईएएस बनना

हेमंत शेष,जीएल गुप्ता और रमेश कुमार जैन के लिए आईएएस बनना रेत के महल का भरभरा कर गिर जाने जैसा साबित हुआ है.आखिर मामला क्या है कि इन्हें आइएएस बनना रास नहीं आया? इन तीनों अधिकारियों के लिए फिर भी संतोष की बात यह है कि अब ये खुद को रिटायर्ड आईएएस कहने का अधिकार पा चुके हैं.

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के इन तीनों अधिकारियों को सरकार ने 31 दिसम्बर को प्रमोट कर आईएएस तो बना दिया पर 1 जनवरी, 2013 को ये रिटार्ड भी हो गये हैं.

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के ये अधिकारी पिछले 17 साल से पदोन्नति की राह तक रहे थे.

हालांकि इस लिस्ट में राज्य प्रशासनिक सेवा के 47 अधिकारियों के नाम हैं. पर इनमें से ज्यादा तर ऐसे हैं जो बतौर आईएएस अगले छह महीने से लेकर दो साल तक इस पद रहकर रिटायर करेंगे.

लालचंद असवाल, प्रमिला सुराना, हंसा सिंह देव,डा. मीणा, अजय सिंह, सुमति लाल वोहरा, विनोद अजमेरा, ओपी यादव,मधुसदन वर्मा आदि ऐसे नाम हैं जो प्रमोटेड पदों पर कुछ दिन काम कर लेने के बाद ही रिटायर होंगे.

जो भी हो राजस्थान सरकार के इस कदम से भले ही एक जनवरी को रिटायर होने वाले अधिकारी अपने पदों के ग्लैमर का उपयोग भले ही नहीं कर सकेंगे पर रिटायरमेंट और पेंशन का उन्हें लाभ तो मिल ही जायेगा.

प्रमोशन के इस क्रम में सरकार ने राजस्थान कैडर के छह आईएएस अधिकारियों को भी अतिरिक्त मुख्यसचिव के वेतनमान पर प्रमोट कर दिया है.जबकि 12 अन्य आइएएस अधिकारियों को अगले पेस्केल पर प्रमोट तो किया है पर उनके लिए इन पदों पर अभी कोई रिक्ति नहीं है.

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