इन बुजुर्ग बिहारी एनआरआई का जज्बा देखकर हैरान रह जायेंगे आप, इस उम्र में भी करते हैं इतने सामाजिक काम

जब भी मुश्किल आये एनआरआइ पेंशनर्स करते हैं दिल खोलकर मदद
-परदेस में बसे बिहारी बुजुर्ग पेंशनर्स का दिल बसा बिहार में, बुजुर्ग हुए हैं लेकिन बिहार के प्रति मदद की इच्छाशक्ति है जवान
पटना
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इतने सामाजिक हैं हमारे एनआरआई बिहारी पेंशनर्स

विदेश में बसे बिहारी बुजुर्ग पेंशनर्स का दिल अब भी बिहारी है. ऐसा बिहारी दिल जो हर मुश्किल में मदद को उठ खड़ा होता है. उस बिहारी दिल में प्रेम भरा है अपनी जन्मभूमि के प्रति, उस बिहारी दिल को गर्व है अपने बिहारी होने पर और वह दिल यह चाहता है कि उनके हमउम्र साथी जब भी कोई अभियान चलायें तो वह भी उनका साथ दें. चाहे वह मुश्किलों में घिरे पेंशनर्स मित्र की मदद करनी हो, सरकार से अपने हक की लड़ाई लड़नी हो, आपदा आने पर अपने राज्यवासियों की मदद करनी हो या फिर पेंशनर्स भवन में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना हो. बिहार पेंशनर्स एसोसिएशन से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा ऐसे एनआरआई पेंशनर्स हैं जो बुजुर्ग तो हो गये हैं लेकिन उनकी अपनी मातृभूमि के प्रति मदद करने की इच्छाशक्ति उतनी ही जवान है. हमने कुछ ऐसे ही पेंशनर्स को ढूंढ निकाला.
माया शंकर वर्मा, पूर्व चेयरमैन, एसबीआइ
माया शंकर वर्मा स्टेट बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं. ये पहले बिहारी थे जिन्होंने इस पद को हासिल किया. 1997 में रिटायर्ड हुए और उसके बाद आइडीबीआइ के चेयरमैन बने, रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के सलाहकार और टेलिफोन रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के भी चेयरमैन पद को सुशोभित कर चुके हैं. गया के रहने वाले माया शंकर वर्मा का ससुराल महेंद्रू पटना में है. अभी दो बेटियों के साथ अमेरिका में रहते हैं. ये पेंशनर्स समाज के आजीवन सदस्य हैं और इनका पेंशन तकरीबन एक लाख रुपये है. ये जब भी पटना आते हैं पाटलिपुत्र के पेंशनर्स भवन में आना नहीं भूलते. मदद के लिए दिल खोल कर सामने आते हैं. इन्होंने 100-100 डॉलर की मदद दो बार की है जो भारतीय रुपये में 1 लाख 30 हजार से ज्यादा है.
लक्ष्मेश्वर दयाल, पूर्व चीफ सेकेट्री, बिहार

लक्ष्मेश्वर दयाल चीफ सेक्रेटी पद से रिटायर हुए थे. 1926 में जन्में दयाल जी 1983 में सेवानिवृत हुए और लगातार पेंशनर्स एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं. अमेरिका में अपने बच्चों के साथ रहते हैं अभी इनकी पेंशन सवा लाख रुपये से ज्यादा है. इनका पाटलिपुत्र में आवास भी है. ये ना केवल प्राकृतिक आपदा भूकंप, बाढ़ या सूखा आने पर मदद के लिए पहल करते हैं बल्कि सरकार से मुकदमा लड़ने में भी मदद करते हैं. ये पत्नी के नाम से एक स्कॉलरशिप योजना भी संचालित करते हैं. ये पेंशनर्स एसोसिएशन के फंड में कई बार मदद की है. इन्होंने बिहार पेंशनर्स के भवन निर्माण में भी 15 हजार रुपये की मदद दी थी.
एल के श्रीवास्तव, पूर्व चीफ इंजीनियर, सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग में चीफ इंजीनियर रहे एलके श्रीवास्तव इन दिनों वाशिंगटन डीसी अमेरिका में रहते हैं. एक बेटा और दो बेटियां वहीं सेटल हैं. जब 1996 में रिटायर होने के बाद अमेरिका गये तो मन नहीं लगता था लेकिन अब इंजॉय कर रहे हैं. अभी लगातार पेंशनर्स को लेकर सरकार के बीच चल रही हलचल से वाकिफ रहते हैं. जब भी मदद की बारी आती है ये आगे आते हैं और अपनी पूरी भूमिका निभाते हैं. लगभग एक लाख रुपये की पेंशन इन्हें मिलती है. श्रीवास्तव जी की दो बेटियों ने उनके नहीं आने की स्थिति में 250 डॉलर की मदद भेजी. यह राशि भी 1़ 50 लाख रुपये से ज्यादा है.
क्या कहते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव?
पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव रविशंकर सिन्हा कहते हैं कि हमारे एनआरआई पेंशनर्स साथी का अपनी मिट्टी के प्रति उत्साह लगातार बना रहता है. वे हमें हर मुश्किल वक्त पर अपनी ओर से मदद को खड़े रहते हैं. वे कैश के साथ ही इंटरनेट के माध्यम से वे मदद की राशि अॉनलाइन भी जमा करते हैं. बिहार पेंशनर्स एसोसिएशन ने इन्हीं मदद के बल पर 14.80 लाख रुपये प्रधानमंत्री और सीएम आपदा राहत कोष में अबतक जमा किये हैं.

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