नाकारे सिस्टम का दंश

मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने के बावजूद झारखंड के 160 छात्र नामांकन से वंचित हैं. इस पर राज्य सरकार और एमसीआई के अपने तर्क हैं. आखिर इन छात्रों की जिंदगी कौन तबाह कर रहा है?

एहसान नहीं, हक मांगती मेडिकल छात्रायें

एहसान नहीं, हक मांगती मेडिकल छात्रायें

विष्णु राजगढ़िया

रांची मे राजभवन के पास अनशन कर रहे 160 मेडिकल छात्र-छात्राओं जिंदगी कौन तबाह कर रहा है? राज्य या केंद्र? यह सवाल हरेक की जुबान पर है. एमसीआई मेडिकल कॉलेजों की सीटों की मंजूरी नहीं दी. दूसरी तरफ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अतिरिक्त 160 छात्र उत्तीर्ण हुए.राज्य ने जरूरी व्यवस्था नहीं की, जिसके कारण सीट कम की गयी. लेकिन अगर सीट पहले ही कम कर दी गयी होती तो झारखण्ड के इन छात्र-छात्राओं का अन्य राज्यों मे नामांकन हो जाता.

इन छात्र-छात्राओं ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर ली है. पर इनका एडमिशन मेडिकल कॉलेजों में नहीं होगा क्योंकि एमसीआई ने कालेजों को सीट अलॉट करने से मना कर दिया है. यह सरकार और एमसीआई का झगड़ा है. इस नकारे सिस्टम की लड़ाई में ये छात्र क्यों पिसें?

ये लोग अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा से आये हैं.मेडिकल काउन्सिल ऑफ़ इंडिया पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है. एमसीआई को पहले ही देखना चाहिए था. पहले सीट कम हो जाती तो झारखण्ड की सीट कम ही रहती लेकिन इन बच्चों का नामांकन अन्य राज्यों में हो जाता. इसलिए अब यह केंद्र सरकार का फर्ज है कि एमसीआई को अपनी जिद छोड़कर झारखंड की सीट 350 करने का निर्देश दे. राज्य सरकार यह गारंटी करे कि जरूरी व्यवस्था तत्काल करेगी. इसके लिए राजनीति भुलाकर तत्काल कदम उठाये जाएँ.

एमसीआई की जिद

राज्य सरकार कल होने वाली कौन्सिलिंग को सिर्फ दो दिन के लिए टाल दे ताकि भाजपा सांसदों को केंद्र सरकार से राहत दिलाने का समुचित समय मिल सके.
मैं आज भी सुबह बच्चों से मिला. इनमें मेरा कोई अपना नहीं. लेकिन हर कोई अपना लगा. आज मेरी बेटी इनमें नहीं है. कल हो सकती है. आज आपका बेटा इसमें नहीं, कल हो सकता है.

कहां हैं हिंदू हितों के रक्षक?

इसलिए आज हर नागरिक को कुछ सवाल उठाने चाहिए. जैसे- इन बच्चों मे ज्यादातर हिन्दू ही हैं. हिन्दू हितों पर मर-मिटने वाले कहाँ हैं? इनमे से ज्यादातर ने अच्छे दिन के लिए ही वोट दिया. लेकिन इनके वोट पर घमंड करने वाले झारखंड के 12 भाजपा सांसद क्या कर रहे हैं? आज सुबह मुझे अनशन स्थल पर धनबाद, कतरास और भागा के तीन छात्र मिले. उनके सांसद पीएन सिंह कहाँ है? कोडरमा के भी कुछ बच्चे थे. सांसद और प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र राय कहाँ हैं? रांची के रामटहल जी कहाँ हैं? अबकी बार सीपी सरकार कहाँ हैं? भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास कहाँ हैं? तीन बार सीएम रहने वाले मुंडा जी कहाँ हैं? झारखण्ड के बुद्धिजीवी कहाँ हैं? चैम्बर की राजनीति में दिन-रात एक करने वाले कहाँ हैं?

कोई है जो प्रधानमंत्री महोदय को बताये कि वो जो सूद सहित हमारा प्यार लौटने आये थे, उसमें बच्चों की भी एक छोटी सी देनदारी रह गयी है? सबके अच्छे दिन आये तो इन बच्चों को क्यों बुरे दिन में धकेल रहे हैं आपलोग?

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