इस शहीद जांबाज आईपीएस के नाम से कांपते थे नक्सली

झारखंड में नक्सलियों के हमले में पाकुड के एसपी अमरजीत बलिहार सहित छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए अमरजीत 2003 में प्रोमोट होकर डीएसपी से एसपी बने थे उनके नाम से ही नक्सली कांपने लगते थे

अमरजीत बलिहार आईपीएस 2003 बैच

अमरजीत बलिहार आईपीएस 2003 बैच

नक्सलियों ने हमले को काठीकुंड के जंगलों में उस वक्त अंजाम दिया जब एसपी अमरजीत बलिहार डीआईजी के साथ मीटिंग करके लौट रहे थे. बिलहार मात्र डेढ महीने पहले ही पाकुड के एसपी बनाये गये थे. उन्होंने 1986 में डीएसपी की हैसियत से ज्वाइन किया था. वह नक्सलियों के लगातार छक्के छुड़ाने वाले जांबांज अफसरों में से थे.

हाल ही में नक्सलियों ने एक कंस्ट्रकशन कम्पनी पर धावा बोल कर अनेक लोगों को मार डाला था. इसके बाद बलिहार ने नक्सलियों के खिलाफ कड़ा अभियान छेड़ रखा था.
जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बिलहार पर नक्सलियों ने इससे पहले भी कई बार हमला करने की योजना बनाई थी. पर तेज तर्रार बलिहार हर बार उनके निशाने से बचते रहे. लेकिन आज की घटना ने पुरे पुलिस तंत्र को सकते में डाल दिया है.

लेकिन आज के नक्सली हमले ने जितना बड़ा जख्म पुलिस तंत्र को दिया है उससे ज्यादा पीड़ा दुमका सदर अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही से मिली है. जब घायल अवस्था में पुलिस जवानों को दुमका सदर अस्पताल पहुंचाया गया तो वहां एक भी डाक्टर मौजूद नहीं था. हद तो तब हो गयी जब डाक्टरों का दल एक घंटे बाद तब पहुंचा जब स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने भारी हंगामा किया. खबर है कि इस अस्पताल के कुछ डाक्टर निजी प्रेक्टिस में ब्यस्त थे.

पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की नाराजगी की वजह यह भी थी कि ये डाक्टर सरकार से वेतन लेते हैं और निजी प्रेक्टिस से पैसे बनाने में लगे थे.

पिछले सात सालों में झारखंड के 244 पुलिस अफसर और जवानों की बलि नक्सलियों ने ले ली है.

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