उत्पाद अधीक्षिका अप्राकृतिक मौत: यहां छुपे हैं रहस्य!

विनायक विजेता उन फोन कॉल्स डिटेल तक पहुंच गये हैं जिससे यह पता लगाया जा सके कि उत्पाद अधीक्षिका रेणु की अप्राकृतिक मौत का असल कारण क्या है. पढें यह एक्सक्लुसिव रिपोर्ट

रेणु की आखिरी तस्वीर( ऊपरी हिस्सा हमने हटा दिया है)

रेणु की आखिरी तस्वीर( ऊपरी हिस्सा हमने हटा दिया है)

बीते 12 अप्रैल को जहानाबाद स्थित अपने आवास पर फांसी के फंदे में झुलती पाई गर्इं जहानाबाद की उत्पाद अधीक्षिका रेणु कुमारी की मौत का रहस्य उन 28 फोन काल्स में छिपा है.

जिस एक ही नंबर पर उन्होंने घटना के दिन 28 बार बात की थी। रेणु ने घटना के एक दिन पूर्व यानी 11 अप्रैल की रात 10:32 पटना मे रहने वाली अपनी महिला मित्र सोनी सुकृति सिंह को फोन किया।

बातचीत का क्रम आठ बार चला। रेणु ने उस रात सोनी को अंतिम कॉल रात 11 बजकर 48 मिनट पर किया जिसमें उनकी सोनी से 26 सेकेंड बात हुई। घटना के दिन यानी 12 अप्रैल को रेणु कुमारी ने अपने नीजी मोबाइल 9431049494 से सोनी के मोबाइल 9473030670 पर सुबह 8 बजकर 7 मिनट पर पुन: कॉल किया। इसके बाद से इन दोनों नंबरों पर दोपहर 1 बजकर 36 मिनट के बीच 28 बार बातें हुर्इं।

रेणु और सोनी के बीच अंतिम बार 1 बजकर 36 मिनट पर शुरू हुई बात 374 सेकेंड तक चली। इसके कुछ देर बाद ही रेणु फंदे पे लटक गई या लटका दी गर्इं। रेणु की मौत का मामला हत्या है या आत्महत्या इसका तो अबतक खुलासा नहीं हो सका है पर इतना तय है कि रेणु की मौत का रहस्य एक ही नंबर पर किए गए इन मोबाइल कॉल में अवश्य छिपा हुआ है।

यही है कॉल्स डिटेल: क्यों की रेणु ने 28 कॉल्स?

यही है कॉल्स डिटेल: क्यों की रेणु ने 28 कॉल्स?

यह सोनी सुकृति कौन हैं?

रेणु के बारे में बताया जाता है कि बीएसएनएल के नंबर वाला उनका नीजी मोबाइल फोन में बीएसएनएल टू बीएसएनएल बात करने की फ्री सुविधा थी इसलिए बीएसएनएल धारित किसी परिचित का फोन आने पर वह उसे काट अपनी तरफ से फोन करती थीं। उत्पाद अधीक्षक जैसे व्यस्त पद पर रहने वाली रेणु कुमारी की आखिर क्या बाध्यता थी कि घटना के दिन उन्होंने 28 बार सोनी सुकृति सिंह से 28 बार बातें की जो उनसे उम्र में छोटी है तथा रेणु को दीदी भी कहती थी?

बताया जाता है कि रेणु और सोनी की बड़ी बहन मगध महिला कॉलेज में बैच मैट थी जिस कारण रेणु की पहचान सोनी से हुई और वह उन्हें दीदी कहती थी।
सोनी के पिता एक्साइज विभाग के ही बक्सर स्थित बेवरेज कॉरपोरेशन में डीपो मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। घटना के बाद सोनी ने ही यह बातें फैलायीं थी कि घटना के दिन उसकी रेणु से बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि जहानाबाद के डीएम ने उन्हें बहुत प्रताड़ित किया है जिसके कारण वह तनाव में हैं जबकि ऐसी कोई बात ही नहीं थी।

कहीं ऐसा तो नहीं कि रेणु कुमारी की किसी कमजोरी के बारे में किसी को पता हो और वह उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा था जिसके कारण उन्हें आत्महत्या जैसे विकल्प को अपनाना पड़ा।

इस संदर्भ में जब मैंने सोनी सुकृति सिंह के मोबाइल नंबर 9473030670 पर बात कर यह जानना चाहा कि क्या कारण था कि घटना के दिन उनकी रेणु से 28 बार बातें हुई तो उसने टका सा जबाव दिया कि ‘मैं आपको क्यों बताऊं, मुझे जो बताना था वह मैंने जहानाबाद की एसपी मैडम को बता दिया है।’

सोनी ने जहानाबाद की एसपी सायली धूरत को क्या बताया इसे बताने से एसपी ने भी यह कहते हुए इनकार किया कि इससे जांच प्रभावित होगी।

रेणु मामले में एक और चौकाने वाली बात सामने आ रही है। घटना के आठ दिन पूर्व यानी 4 अप्रैल को रेणु कुमारी के बैंक खाते से 50 हजार रुपए निकाले गए थे। पटना के एक्जीविशन रोड स्थित एचडीएफसी बैंक के ब्रांच से चेक संख्या 0090681 से यह रुपए शैलेन्द्र्र कुमार ने निकाले।

शैलेंद्र ने क्यों लिए 50 हजार?

शैलेन्द्र की पटना में शराब की दो लाइसेंसी दूकान है और वह सोनी सुकृति सिंह का करीबी भी है। यहां तक कि रेणु की मौत के बाद सोनी शैलेन्द्र के साथ ही जहानाबाद गई थी। जब मैंने शैलेन्द्र से उसके मोबाइल नंबर 9334068201 पर फोन कर रेणु के खाते से निकाले गए रुपए के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि ‘मैडम अक्सर उससे कर्ज लेती थीं या टीवी, फ्रीज जैसा सामान खरीद कर अपने पटना स्थित आवास में पहुंचा देने को कहती थीं। उसी कर्ज को लौटाने के एवज में उन्होंने उस 50 हजार का चेक दिया था।’

पर उसने टीवी फ्रीज या कोई अन्य उपकरण कब उनके घर में पहुंचाया इस सवाल का जवाब शैलेन्द्र नहीं दे सके। शैलेन्द्र की यह बात कुछ हजम होने वाली भी नहीं लगती। लगभग 40 हजार रुपए वेतन पाने वाली और उत्पाद अधीक्षिका जैसे प्रतिष्ठित पद पर रहने वाली रेणु कुमारी जिसके पति वैभव कुमार खुद प्रखंड विकास पदाधिकारी हैं, ससुर रिटायर्ड चीफ इंजिनीयर हैं जिन्हें 50 हजार रुपए पेंशन मिलते हैं, जिनके घर में सिर्फ चार लोगों का परिवार है वह कर्ज क्यों लेगी?

कहीं ना कहीं यह पूरा मामला फरेब, धोखा और विश्वासघात से जूड़ा है। नि:संतान रेणु की कहीं ऐसी कोई जरुरत नहीं दिखती जो उन्हें किसी से कर्ज मांगने को मजबूर करे। रेणु की मौत का रहस्य बीते 11 अप्रैल की रात से 12 अप्रैल के दोपहर बाद तक एक ही नंबर पर हुए उन 36 फोन काल्स में ही दफन हैं जिस नंबर पर रेणु की लगातार बात होती रही।

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