उर्दू शिक्षकों के 27 हजार पद रिक्त, अभ्यर्थी 16 हजार, फिर नियुक्ति नहीं, ऐसा क्यों सीएम साहब?

बिहार शिक्षा विभाग के अनुसार बिहार में 27000 उर्दू शिक्षक पद रिक्त है। लेकिन सफल अभ्यिर्थियों की संख्या मात्र 16000 है। फिर भी बहाली सिर्फ अभी तक 5 प्रतिशत की हो पाई है। लेकिन जिलों में रिक्तियाँ नहीं हैं।nitish
बोलिये! रिक्ति ज्यादा अभ्यर्थी कम, फिर भी बहाली नहीं। पेचीदगी और उलझाव कहाँ है।
गौर किजिए!!
मान्यवर,
मंख्यमंत्री जी याद किजिए! लोकसभा चुनाव 2014 जब आपकी पार्टी जनतादल यू0 तनहा चुनाव मैदान में थी। मुस्लिम वोट की धुर्वी करणकी वजह से जनतादल यू0, काँग्रेस और आर0जे0डी0की करारी हार हुई थी। लेकिन मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में (सीमांचल, किशनगंज, अररिया पूर्णियाँ, कटिहार) मौजुदा महागठबंधन की जीत हुई थी।
फिर आपने 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव महागठबंधन बना के लड़ा। जिसमंे पूरे बिहार समेत सीमांचल में कट्टर मुस्लिम लीडर की पहचान वाले जनाब असदुद्दीन ओवैसी (सांसद हैदराबाद) को यहाँ के मुसलमानों ने नाकारते हुए आप पर विपश्वास किया। आपका साथ दिया। आपके हाथेों को मजबूत किया। चूँकि आपमें सक्यूलरवाद, सामाजवाद की दीप जलती है। आप विकास पुरूष हैं। आप इंसाफ के साथ बिहार वासियों की तरक्की के लिए कटिबद्ध हैं। आपकी अगुवाई में पिछले 10 सालों से बिहार ने नए कृतिमान स्थापित किया है। बिहार वासियों को आप पर गर्व है।

लेकिन ये तभी संभव है जब पूर बिहार में हर एक प्राथमिक स्कूल में उर्दू शिक्षक की बहाली सरकारी कार्यालय में उर्दू का चलन बढ़ेगा। हाशिये पर खड़ा बिहार की अल्पसंख्यक समुदायकों कोआपसे काफी उम्मीदें वाबस्ता हैं। उर्दू के साथ साथ अल्प संख्यक समस्याओं का निदान आपके ॅवतसक थ्ंउम नारा इंसाफ के साथ तरक्की हकीकत में तबदील करेगा।
अतः आप श्रीमान से निवेदन है कि 2013 में उर्दू शिक्षक के लिए सफल हुए 16882 अभ्यर्थियों को बहाल करें। बहाली प्रक्रिया को आसान भी बनाऐं। बाके बचे 11000 रिक्तियों के विरूद्ध एक और स्पेशल उर्दू का आयोजन करवाऐं।
प्रेषकः- अब्दुल गनी

केन्वेनर आल बिहार उर्दू एवं बंगला सफल
शिक्षक अभ्यर्थी संघ, पटना, बिहार

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