ऋतिक अपहरण व हत्या ने बिहार पुलिस को कराया संसाधनों की कमी का एहसास

एकंगरसराय के व्यवसायी के अपहरण व हत्या ने बिहार पुलिस को संसाधनों की कमी का एहसास करा दिया और उसे इस मामले में झारखंड पुलिस से मदद लेनी पड़ी.

मोबाइल लोकेटर डिवायस

मोबाइल लोकेटर डिवायस

विनायक विजेता

बिहार में अपराध नियंत्रण की दिशा में काफी प्रयत्नशील बिहार पुलिस के लिए संसाधनों की कमी अपराध नियंत्रण के आड़े आ रहा है। यूं तो अन्य राज्यों की अपेक्षा बिहार पुलिस के पास कई संसाधनों की कमी है पर दो संसाधन ऐसे हैं कि अगर ये संसाधन बिहार पुलिस को हासिल हो जाएं तो किसी तरह के अपराधी पुलिस की नजरों से बच नहीं सकते।

‘जेएचएम मोबाइल लोकेटर डिवाईस’ का कमाल

 

बिहार पुलिस के पास क्राईम कंट्रोल के लिए सबसे जरूरी ‘जेएचएम मोबाइल लोकेटर डिवाईस’ अ‍ौर कमसे कम एक दर्जन पुलिसकर्मियों के बैठने की क्षमता वाला एक हैलीकाप्टर भी है जो आपातकाल या किसी जटिल और महत्वपूर्ण ऑपरेशन के दौरान कमांडो या पुलिसकर्मियों को जल्दी से उसके गंतव्य तक पहुंचा दे।

बिहार पुलिस के लिए वर्तमान में सबसे बड़ी जरुरत ‘मोबाईल लोकेटर डिवाईस’ की है जो डिवाईस शुन्य से 160 डिग्री के पैमाना अनुसार अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल और उसके नंबर का सटीक लोकेशन बता देता है। उदाहरण स्वरुप अगर कोई अपराधी पटना के इनकम अ‍ैक्स गोलम्बर के पास से मोबाइल का उपयोग कर रहा हो तो ‘मोबाईल लोकेटर डिवाईस’ उसके खड़े होने के स्थान के साथ गोलम्बर से उसकी दिशा, कोण और दूरी तक बता देगा।

फिलवक्त पटना पुलिस के पास जो संसाधन हैं उससे सिर्फ इतना पता चलता है कि अपराधियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे मोबाइल का टावर लोकेशन क्या है पर सही स्थान का पता नहीं चल पाता। सूत्रों के अनुसार बिहार पुलिस ने कई जटिल मामलों को सुलझााने में झारखंड पुलिस के पास मौजूद ‘मोबाईल लोकेटर डिवाईस’ की मदद ली है। बीते रविवार को एकंगरसराय में अपृह्त स्कूली छात्र ऋतिक राज, जिसकी हत्या कर दी गई, के हत्यारों का सटीक मोबाइल लोकेशन पता करने में झारखंड पुलिस के इसी ‘मोबाईल लोकेटर डिवाईस’ की मदद ली गई।

झारखंड पुलिस द्वारा ही दी गई सूचना पर पुलिस ने दो हत्यारो की गिरफ्तारी कर ऋतिक की लाश बरामद की। बिहार पुलिस के पास एक दूसरी कमी हैलीकाप्टर की है। इस कमी को देखते हुए बिहार के गृह विभाग ने कुछ माह पूर्व सरकार के पास ‘वेटलीज’ यानी घंटे के अनुसार उड़ान का भुगतान करने के आधार पर हैलीकाप्टर कंपनियों से प्रस्ताव मांगने का आग्रह किया है पर इस दिशा में भी अभी कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।

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