एक आईएएस की पुस्तक: फिर निकला गुजरात दंगों का जिन्न

अनिता गौतम
एक नौकरशाह की पुस्तक ने एक दशक पूर्व हुए गुजरात दंगों के जिन्न को दुबारा बाहर निकाल दिया है और नरेंद्र मोदी के बारे में लिखा है कि उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कई निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया.

1965 बैच के आईएएस अधिकारी ने अपनी ऑटोबायोग्राफी “द इंसाइडर्स व्यू- मेमोरीज ऑफ ए पब्लिक सर्वेंट” में गुजरात दंगों पर तथ्यात्मक बातें लिख कर खलबली मचा दी है.यह पुस्तक हाल ही में प्रकाशित हुई है.

पुस्तक के लेखक जाविद चौधरी 2002 में वाजेपेयी सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव थे.

पुस्तक के अठारहवे अध्याय में लेखक ने लिखा है कि प्रधानमंत्री वाजपेयी के निर्देश को रद्दी की टोकरी में डालते हुए नरेंद्र मोदी ने एक रिलीफ कैम्प में केंद्रीय स्सवास्थ्य मंत्री को जाने से रोक दिया था. इतना ही नहीं चौधरी लिखते हैं कि मोदी सरकार के एक तत्कालीन मंत्री अशोक भट्ट ने तब यहां तक धमकी दी थी कि अगर केंद्रीय मंत्री शाह आलम नामक रिलीफ कैंप में जाने की जिद करेंगे तो वह चलती कार के आगे कूद कर जान दे देंगे.

चौधरी अपनी पुस्तक के एक अध्याय “डिस्चार्ज ऑफ राजधर्मा? 2002” में लिखते हैं,मोदी ने प्रधानमंत्री वापपेयी के द्वारा रिलीफ कैंप में रह रहे लोगों के लिए दवाओं के ऑफर को भी ठुकरा दिया और यह बताया कि वहां के हालात ठीक हैं जबकि वाजपेयी ने बार बार कहा कि वहां की स्थितियां ठीक नहीं हैं.

चौधरी ने अपनी पुस्तक में प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ हुई बैठक का हवाला दिया है जहां मोदी ने तथ्यों के बारे में पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया था.उस प्रजेंटेशन से वाजपेयी बिल्कुल असहमत और असहज थे.उन्होंने लिखा है कि वाजपेयी ने मोदी से अपनी स्पष्ट नाराजगी भी जताई थी.

चौधरी ने लिखा है कि इस मीटिंग में तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला था.

चौधरी ने अपनी पुस्तक में तत्कालीन नौकरशाहों को भी नहीं बख्शा है और कहा है कि कई नौकरशाहों ने अपने संवैधानिक अधिकारों का भरपूर दुरोपयोग किया और संविधान में मिले अधिकारों के अनुसार अपनी ड्युटी नहीं निभाई.

नया विवाद

इस पुस्तक के सामने आते ही एक और विवाद तब खड़ा हो गया जब गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार ने इस पुस्तक के कुछ अंशों को आधार बनाकर नानावती कमीशन और विशेष जांच दल को भेजा है.श्रीकुमार ने पुस्तक के इन अंशों को सही ठहराते हुए कहा है कि जांच के दौरान इन तथ्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.श्री कुमार ने इन तथ्यों को शपथ पत्र में भी शामिल किया है.

श्री कुमार ने अपने पत्र में इस पुस्तक के हवाले से कमीशन को लिखा है कि मोदी सरकार ने अनैतिक तरीके से केंद्र सरकार और देश की जनता को वही बताने की कोशिश की थी जो वह बताना चाहती थी जबकि सच्चाई बिल्कुल विपरीत थी.

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