एक आईएएस जिन्होंने मृत संस्था को जीवित कर दिया

कुछ साल पहले केंद्रीय सचिव के अहदे से रिटायर होने के बाद 74 बैचे के ये आईएएस बिहार पहुंचे तो नीतीश कुमार ने उन्हें नयी जिम्मेदारी सौंप दी. पढ़ें फिर क्या हुआ?

एएनपी सिन्हा 1974 बैच के आईएएस हैं

एएनपी सिन्हा 1974 बैच के आईएएस हैं

इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन

नौकरशाही के गलियारे में एएनपी सिन्हा के नाम से चर्चित सिन्हा का पूरा नाम अलख निरंज प्रसाद सिन्हा है. दिसम्बर 2011 में रिटायर होने के पहले वह वह केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव और सचिव जैसे महत्पूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं. लेकिन जब वह रिटायर हो कर अपने गांव में रह कर कुछ सृजनात्मक काम करने की इच्छा लिए बिहार पहुंचे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनसे सम्पर्क साधा और एक बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य करने की जिम्मेदारी उठाने को कहा. यह जिम्मेदारी थी बिहार राज्य योजना पर्षद को पुनर्जीवित करना.

बिहार राज्य योजना पर्षद यानी प्लानींग बोर्ड एक मृत संस्था के रूप में पिछले चार दशक से बेकार पड़ा था. काफी उहापोह के बाद एएनपी सिन्हा ने बोर्ड का सदस्य बनने की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली और तय किया कि इस संस्था को वह न सिर्फ पुनर्जीवित करेंगे बल्कि इसकी भूमिका और उपयोगिता को भी साबित करेंगे.

क्या है प्लानिंग बोर्ड

सरकार की योजाओं की रूप रेखा योजना विभाग बनाता है पर इन योजनाओं का लाभ समानता और न्याय के साथ सभी समुहों तक पहुंच सके इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने 1972 में बिहार स्टेट प्लानिंग बोर्ड का गठन किया था. इसी परिप्रेक्ष्य में प्लानिंग बोर्ड को लॉंग टर्म और शॉर्ट योजनायें बनाना है.पर यह बोर्ड पिछले चार दशकों से लगभग मृतप्राय: ही रहा.

लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बोर्ड को पुनर्जीवित करने के मकसद से इसमें कार्यकुशल लोगों को जोड़ने की कोशिश की. एएनपी सिन्हा पिछले दो सालों से बोर्ड के सदस्य हैं. इन दो सालों में बोर्ड को उन्होंने न सिर्फ पुनर्जीवित करने में महत्पूर्ण भूमिका निभाई है बल्कि इस की उपोयगिता भी सिद्ध करने की कोशिश की है. बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग के तकनीकि पक्ष को प्लानिंग बोर्ड ने ही संभाला था. इस संबंध में एएनपी सिन्हा कहते हैं- स्पेशल कटेग्री स्टेटस के लिए हमने काफी अध्ययन के बाद एक रिपोर्ट तैयार की और इस संबंध में सरकार को कई सुझाव दिये.

इतना ही नहीं पिछले दो सालों में प्लानिंग बोर्ड ने राज्य के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्लान डाक्युमेंट्स तैयार किये जिस पर सरकार काम कर रही है. सिन्हा कहते हैं इससे पहले बिहार में प्लान डाक्युमेंट्स की परम्परा नहीं थी. लेकिन अब इसे भी शुरू किया गया है.

हालांकि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलने की औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है पर जानकारों का मानना है कि अभी तक इस दिशा में जो प्रगति हुई है उसमें प्लानिंग बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है.

एएनपी सिन्हा प्लानिंग बोर्ड के कामों के बारे में बताते हुए कहते हैं. दर असल प्लानिंग बोर्ड केंद्र सरकार के प्लानिंग कमिशन की तर्ज पर राज्य सरकार की संस्था है. चूंकि हमने प्लानिंग कमिशन में भी कई सालों तक काम किया है इसलिए मैंने अपने अनुभवों का इस्तेमाल भी इस संस्था के लिए किया है. आने वाले कुछ दिनों में हम कुछ और महत्पूर्ण योजनाओं के साथ राज्य सरकार से चर्चा करेंगे.

दुविधा

हालांकि राज्य सरकार के पास योजनाओं के निर्माण और उसके क्रियान्वयन की मानिटरिंग के लिए बाजाब्ता एक विभाग है जो इस तरह के कार्यों की जिम्मेदारी निभाता है. यह विभाग राज्य सरकार के प्रधान सचिव स्तर के अधीन काम करता है. ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि योजना विभाग के रहते हुए योजना पर्षद की क्या जरूरत है? इस सवाल के जवाब में एएनपी सिन्हा कहते हैं.

योजना विभाग को डे टुडे की गतिविधियों और योजनाओं पर काम का काफी दबाव होता है. ऐसे में प्लानिंग बोर्ड लॉंग टर्म योजनाओं पर अपना ध्यान केंद्रीत करता है.जो काफी महत्वपूर्ण काम है.

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