एक साथ चुनाव कराया जाना चुनौती, पर राह निकालनी होगी

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने देश में लोकसभा और विधान सभाओं के चुनाव एक साथ कराने की चुनौती का समाधान निकालने पर बल देते हुए शुक्रवार को कहा कि निरंतर चुनाव के चलते समाज भारी तनाव में जी रहा है।

श्री सिंह ने कहा कि एक साथ चुनाव का मुद्दा निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण विषय है, लेकिन राजनीतिक व्यवस्था को इसका समाधान निकलना ही चाहिए और इसमें मीडिया की एक सार्थक भूमिका है। पत्रकारिता से राजनीति में आये श्री सिंह ने कहा कि मीडिया को वैचारिक, राजनीतिक, बुनियादी एवं आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ प्रशासन में पारदर्शिता लाने और कानूनों के अनुपालन एवं प्रवर्तन में खामियों के मुद्दे पर बहस होनी चाहिए। इस कार्य में सामाजिक एवं पत्रकार संगठन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उपसभापति नई दिल्‍ली में ‘चुनाव और मीडिया’ विषय पर एक परिचर्चा में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। परिचर्चा का आयोजन नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) से संबद्ध दिल्ली पत्रकार संघ (डीजीए) और मतदाता जागरूकता के लिए समर्पित सामाजिक संगठन ‘भारतीय मतदाता संगठन’ ने मिलकर किया।
उन्होंने कहा, ”मैं छात्र जीवन से चुनाव सुधारों की चर्चा सुन रहा हूं। ‘राइट टू रिकॉल’ (निर्वाचित जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार) की चर्चाएं पांच दशक से भी अधिक समय से चल रही हैं, परन्तु पिछले तीन चार दशकों में कुछ मुद्दों पर स्थिति बद से बदतर हुई है।”
लोकसभा और विधान सभाओं के चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि लगातार पांच वर्ष तक चुनाव पर चुनाव कराते रहने से जातीय, धार्मिक, क्षेत्रीय और भाषायी आधार पर सामाजिक तनाव चरम पर होता है। कम से कम इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि पांच साल तक इस तरह का तनाव न रहे। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव के मामले में अड़चनें जरूर हैं, परन्तु राजनीतिक दलों की जिम्मदारी है कि इसका समाधान निकाला जाये।

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