एडिटोरियल कमेंट: तो कांग्रेस द्वारा बिहार में गठबंधन तोड़ने की धमकी के ये हैं माने !

कांग्रेस, जनता पर पड़ने वाले नोटबंदी के प्रभाव से उत्साहित है कांग्रेस ने  एक तीर से दो निशाना लगाते हुए यहां तक कह डाला कि आला कमान का निर्देश मिले ते आज भी बिहार का गठबंधन टूट सकता है.पढ़िये नौकरशाही डॉट कॉम के एडिटर इर्शादुल हक का विश्लेषणcongress

बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और गठबंधन सरकार में शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने  नोटबंदी के खिलाफ निकाले गये मार्च के दौरान बुधवार को कहा कि आला कमान चाहे तो एक दिन में गठबंधन टूट सकता है.

गठबंधन सरकार के शिक्षा मंत्री ने यह बात यूं ही नहीं कह दी. वह इस बात के कहने के जोखिम को समझते हैं. नोटबंदी पर जनता दल यू का स्टैंड ढुल-मुल  भरा है जबकि महागठबंधन के अन्य सहयोगी राजद विरोध तो कर रहा है पर सड़क पर उतर कर आक्रामकता दिखाने से कतरा रहा है.

वहीं अशोक चौधरी के इस बयान पर जद यू के प्रवक्त केसी त्यागी ने आश्चर्य जताया और कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि चौधरी ने ऐसा बयान क्यों दिया.

दर असल नोटबंदी पर देश में दो- तीन पार्टियां ही लीड़ ले रही हैं. इनमें कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और बसपा सबसे मुखर हैं. उत्तर प्रदेश में सपा भी विरोध में तो है पर निर्णायक आंदोलन के मूड में नहीं है. लेकिन नोटबंदी पर कांग्रेस ने जो स्टैंड अपने बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी के मार्फत लिया  है वह उत्तर प्रदेश की राजनीति को ध्यान में रख कर लिया गया कदम लगता है.

अशोक चौधरी:आला कमान कहे तो कभी भी टूट सकता है गठबंधन

अशोक चौधरी:आला कमान कहे तो कभी भी टूट सकता है गठबंधन

दर असल जद यू उत्तर प्रदेश चुनाव में अजित सिंह के साथ मिल कर अलग गठबंधन की घोषणा कर चुका है. जबकि कांग्रेस संभवत यह चाहती है कि जिस तरह वह जद यू के साथ बिहार में साथ है, उसी तरह जद यू उसे यूपी में समर्थन करे.  उधर उत्तर प्रदेश में सपा के साथ उसके गठबंधन की बात आगे नहीं बढ़ पा रही है. इधर जद यू ने अपना राग यूपी में अलग कर लिया है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि कांग्रेस नोटबंदी के नाम पर गठबंधन के अस्तित्व पर सवाल उठा कर उसे यूपी के चुनाव के मद्देनजर प्रेशर गेम खेल रही है.

कांग्रेस नोटबंदी पर मुखर रूप से आने में अपनी भलाई इसलिए समझ रही है कि भाजपा से बिदके मतदाताओं का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है. क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों सवर्ण मतदाताओं को अपनी तरफ खीचने में साम्यता रखती हैं. स्वाभाविक तौर पर कांग्रेस को पता है कि भाजपा से नाराज मतदाता, सप या बसपा के खाने में जाने के बजाये कांग्रेस की तरफ रुख करना ज्यादा सहजता से स्वीकार करेंगे.

ऐसे में कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष का गठबंधन सरकार पर उठाया गया सवाल एक तीर से दो निशाने के समान माना जाना चाहिए.

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जद यू ऐसे बयान के बाद क्या रुख अपनाता है.

 

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