एडिटोरियल कमेंट: शहाबुद्दीन, तेज प्रताप के साथ कैफ की तस्वीर, कुछ सच्चाई समझ लीजिए

पत्रकार राजदेव रंजन हत्या मामले में जो चार्जशीट दायर की गयी थी उसमें मोहम्मद कैफ का नाम नहीं था. जिसको संदेह है वह पुलिस की चार्जशीट देख सकता है.Shahabuddin-TejPratap

इर्शादुल हक,एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

फिर सवाल यह है कि मोहम्मद कैफ, जिसकी शहाबुद्दीन और तेज प्रताप यादव के साथ फोटो वायरल हुई थी उसे किस मामले में पुलिस को तलाश थी. यही सवाल सुप्रीम कोर्ट ने भी सीवान कोर्ट से पूछा है. फोटो वायरल होने के बाद मीडिया ने जिस तरह से हंगामा मचाया उसमें असल मामला दब गया. और सब की नजरें शहाबुद्दीन और तेज प्रताप के ऊपर टिक गयीं. कुछ दिनों बाद मोहम्मद कैफ ने अदालत में समर्पण कर दिया. उसका यह समर्पण पत्रकार राजदेव रंजन के मामले में नहीं था. बल्कि उसने मारपीट और धमकी देने के मामले में खुद को अदालत में समर्पण किया था.

सोमवार को इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार के वकील ने अपना पक्ष रखा तो जरूर लेकिन उन्हें इस तकनीकी जानकारी का पता नहीं था कि मोहम्मद कैफ के ऊपर किस धारा के तहत केस दर्ज था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसी जानकारी को सीवान के सेशन जज को देने का आदेश दिया.

दर असल मोहम्मद कैफ सबसे पहले 10 सितम्बर को शहाबुद्दीन के साथ एक वीडियो में देखा गया था. उसके बाद कैफ की तस्वीर स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ देखी गयी थी. उसमें वह तेज प्रताप यादव को बुके दे रहा है. इस मामले में तब तेज प्रताप ने कहा था कि उनसे सैकड़ों लोग मिलते हैं औऱ किसी के माथे पर उसके अपराधों का डिटेल नहीं लिखा होता.

इस मामले में याद करने की बात है कि मोहम्मद कैफ पर पुलिस को इस बात का संदेह था कि हो सकता है कि वह राजदेव रंजन मामले में शामिल हो. लेकिन पुलिस को जो चांच और तफ्तीश में उसके बारे में कुछ खास हाथ नहीं लगा था.  उसके बाद जो चार्जशीट दाखिल की गयी थी उसमें मोहम्मद कैफ का नाम नहीं पाया गया था. यह याद रखने की बात है कि चार्जशीट  काफी पहले दायर की गयी थी और उसके बाद ही मोहम्मद कैफ शहाबुद्दीन के साथ फोटो में देखा गया था. शहाबुद्दीन 10 सितम्बर को भागलपुर जेल से रिहा हुए थे.

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो अपना कड़ा तेवर दिखाया है उससे सीवान की अदालत की मुश्किलें ही बढ़ी हैं. अब देखन है कि इस मामले में सीवान की अदालत क्या जवाब देती है.

इस में दिलचस्प मामला यह भी है कि पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी को कैफ पर संदेह था. लेकिन उसका नाम वह खुल कर नहीं ले रही थीं. कैफ का नाम तब उछला जब उसकी तस्वीर शहाबुद्दीन और तेज प्रताप के साथ वायरल हुई.

हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजदेव रंजन के हत्यारोपियों को जमानत देने से फिलहाल मना कर दिया है लेकिन जब इस मामले में सीवान कोर्ट की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को मिलेगी और तब वह दोबारा सुनवाई करेगा तो कुछ और उलझाव के बिंदु खुल चुके होंगे.

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