एसएसपी ने छुए चरण, राम गोपाल ने कहा- ‘तो क्या हुआ’?

सवाल यह नहीं है कि एटा के एसएसपी अजय मोहन शर्मा ने राम गोपाल यादव के चरण स्पर्श किये, मुद्दा यह है कि चरण छूने के बाद उन्होंने कहा “मैं तो दूसरों को चरण छूने से रोकने के लिए झुका था”.

हंगामा तब खड़ा हो गया जब राम गोपाल ने यह कह दिया कि चरण छूना तो महज एक शिष्टाचार का मामला है.

एसएसपी द्वारा चरण छूने पर हंगामा( साभार अमर उजाला)

एटा के सीनियर एसपी ने शहर में आँखों के इलाज के सिलसिले में लगे कैम्प के दौरान समाजवादी पार्टी के महासचिव और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव के चरण छुए थे.

एक आईपीएस अधिकारी द्वारा किसी नेता के चरण छूने से हंगामा खड़े करने वालों का सोच यह है कि यह तो एक नौकरशाह की चापलूसी की हद है.यह खबर जैसे ही राजनीतिक गलियारे में पहुंची, लोगों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया.

राम गोपाल यादव ने यह भी कहा कि एक पुलिस अधिकारी द्वारा चरण स्पर्श करना तो आय दिन का मामला है, यह कोई खास बात नहीं है.

पर उत्तर प्रदेश की नौकरशाही के गलियारे में नजर रखने वाले लोग जानते हैं कि अगले कुछ दिनों में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला होने वाला है.ऐसे में सत्ता के सामने सर झुका कर अगर एसएसपी साहब ने अपनी वफादारी दिखाने की कोशिश की है तो इसके अर्थ समझे जा सकते हैं.

एसएसपी साहब को अगर राम गोपाल के चरणों में जाने से एक अदद अच्छी पोस्टिंग की उम्मीद हो तो चरण छूना कौन सी बड़ी बात है.

पर कुछ लोग तिल का ताड़ बनाने में माहिर हैं.

पिछली बार मायावती शासन में इसी तरह एक आईपीएस अधिकारी ने उनके जूते में लगी धूल को अपने रूमाल से क्या साफ कर दिया, लोगों ने बवाल मचा दिया था.

लेकिन कुछ भी हो एटा के एसएसपी साहब ने कम से कम चरण स्पर्श के बाद इतनी हिम्मत तो दिखाई कि उन्होंने कह दिया कि वो तो दूसरों को चरण छूने से रोकने के लिए झुके थे.
ऐसे में अगर कोई यह सवाल कर दे कि उन्हें वैसे लोगों को रोकने के लिए आखिर झुकने की क्या जरूरत थी? वह चाहते तो लोगों को झुकने के पहले ही रोक सकते थे. अब इस सवाल का जवाब एसएसपी साहब ही देंगे.

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