कन्हैया कुमार मामले में जगहंसाई झेल चुकी सरकार जाकिर नाइक के खिलाफ साहस नहीं जुटा सकती

जाकिर नाइक मामले में मीडिया के एक वर्ग द्वारा जहर उगलने के बावजूद केंद्र यह जोखिम नहीं उठा सकता कि  उन्हें गिरफ्तार कर हड़बड़ी में जेल में डाल कर ठीक वैसी ही फजीहत झेले जैसी जेनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया के मामले में उसे झेलनी पड़ी थी.zakir.peace

इर्शादुल हक, एडिटर, नौकरशाही डॉट कॉम

मीडिया के एक वर्ग की गलाफाड़ घृणित रिपोर्टिंग एक बात है और सरकार के द्वारा उठाये गये कदम दूसरी बात है. सरकार एक निर्धारित सिस्टम से चलती है. लोकतांत्रिक देश में सरकार की अपनी भूमिका है और न्यायपालिका की अपनी . ऐसे में राजनाथ सिंह के गृहमंत्रालय को हर हाल में फूक-फूक कर कदम रखना होगा. आखिर उसे पता है कि पिछली बार जेएनयू छात्र संघ के नेता कन्हैया कुमार के ऊपर देशद्रोह का मुकदमा करने के बावजूद अदालत के सामने उसके तर्क बहुत काम न आ सके. नतीजा यह हुआ कि कन्हैया को जेल से बेल मिल गया. इस मामले में गृहमंत्रालय की पहले ही इतनी जगहंसायी हो चुकी है कि वह अब जाकिर नायक के मामले में मनमर्जी करने का साहस नहीं कर सकती.

वैसे भी बांग्लादेश में बम विस्फोट के बाद जिन आतंकियों के बारे में बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार को यह कहते हुए भारतीय मीडिया ने कोट किया था कि उसने आतंकियों में से एक को जाकिर नाइक से प्रेरित बताया था, अब डेली स्टार एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर यह साफ कह चुका है कि उसने कभी नहीं कहा कि आतंकी जाकिर नाइक से प्रेरित था.

जांच एजेंसियों को छूटेंगे पसीने

इस बीच इस पूरे प्रकरण को एक हफ्ता हो चुका है लेकिन देश की जांच एजेंसी एनआईए या महाराष्ट्र की एटीएस को जाकिर नाइक के सैंकड़ों वीडियो फुटेज में कहीं भी कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे वे दावा कर सकें कि जाकिर नाइक आतंकवाद का समर्थन करते हैं.जबकि कहा जा रहा है कि इन एजेंसियों ने यूट्यूब पर मौजूद जाकिर नाइक के सैंकड़ों वीडियो फुटेज को रात दिन एक करके खंगाल लिया है.

उधर टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट में जांच एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि नाइक की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ कोई आरोप लगाने से पहले मजबूत साक्ष्य जुटाये बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता. क्योंकि अगर जल्दबाजी में कोई कदम उठाया गया तो इससे अदालत में साबित करना कठिन हो जायेगा.

आतंक के खिलाफ खड़े रहे हैं नाइक

जाकिर नाइक एक अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि के इस्लामी स्कालर हैं. उनके सारे स्टेटमेंट, सारे लेक्चर गूगल और यू ट्यूब पर मौजूद हैं. कोई भी व्यक्ति उसकी पड़ताल कर सकता है. गौर से देखें तो नाइक ने कई बार यह खुल कर कहा है कि किसी भी निर्दोष की हत्या पूरी मानवता की हत्या है. यह बात जाकिर ने इस्लाम के हवाले से कई बार दोहराई है. बल्कि कई बार नाइक ने आतंकवाद की आलोचना की है.

संघ और मीडिया का दांव पड़ेगा उलटा

ऐसे में सवाल उठता है कि भारत के कुछ खास मीडिया हाउसेज ने नाइक को बदनाम किया. ऐसा इस लिए कि देश के कुछ मीडिया घराने नाइक के बहाने साम्प्रदायिक राजनीति को खुलके सह देते हैं. उधर गृहराज्यमंत्री ने जिस दिन यह बयान दिया कि उनका मंत्रालय नाइक के बयानों की जांच कर रहा है, तो इसके पीछे भी उसकी मंशा प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक ही थी. लेकिन जमीनी हकीकत उसे भी पता था इसलिए बयानों के बहाने देश में साम्प्रदायिक ध्रूवीकरण करना चाहती थी. इसका नतीजा यह हुआ के सोशल मीडिया में भी लोगों ने नाइक के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया.

दरअसल संघ और भाजपा के कुछ रणनीतिकार चाहते भी यही थे कि नाइक के हिरोइक इमेज पर हल्ला बोल कर साम्प्रदायिक विभाजन की लकीर को मोटी की जाये. लेकिन वे नाइक के मामले में वहीं गलती कर रहे हैं जो जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के मामले में किया था. याद कीजिए कि कन्हैया कुमार के भाषणों के आधार पर उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा ठोका गया जो कमजोर साबित हुआ. लेकिन इससे कन्हैया कुमार के इमेज को विलेन के बजाये एक हीरो बना दिया.

केंद्र सरकार  और कुछ मीडिया घरानों द्वारा नाइक के खिलाफ मोर्चा खोलने का आखिरकार साइड इफेक्ट यह होगा कि जाकिर नाइक की इमेज और हीरोइक हो कर न निकल जाये.

About The Author

इर्शादुल हक ने बर्मिंघम युनिवर्सिटी इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त की.भारतीय जन संचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की.फोर्ड फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय फेलो रहे.बीबीसी के लिए लंदन और बिहार से सेवायें देने के अलावा तहलका समेत अनेक मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे.अभी नौकरशाही डॉट कॉम के सम्पादक हैं. सम्पर्क irshad.haque@gmail.com

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2 comments

  1. डा मुसाफ़िर बैठा

    सोशल मीडिया में अभी नाइक प्रकरण की तुलना आतंकी ब्रह्मेश्वर मुखिया की शवयात्रा एवं आतंकी राजनेता ठाकरे की शवयात्रा से भी हो रही है. इन मुखिया एवं ठाकरे की शवयात्रा की दहशत टीवी फुटेज एवं अन्य मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंची थी. जहाँ मुखिया के शव के साथ उन्मादी रणवीर सेना एवं भूमिहारों की भीड़ रोड पर सरकार और प्रशासन को गाली गलौज करते, शासन प्रशासन विरोधी नारे एवं ‘रणवीर सेना’ जिंदाबाद चिंघाड़ते एवं कुछ पुलिस कर्मियों को खदेड़ते चल रही रही थी और साथ चल रहे पुलिस एवं प्रशासन के अमले मौन थे, आरा में एक दलित छात्रावास में भूमिहार गुंडों ने तोड़ फोड़ एवं लुट मचाई और पटना में सचिवालय के पास एक मंदिर में आग लगा दी , प्रशासन ने मोटरसाइकल पर सवार भूमिहार गुडों के गाड़ी नंबर भी नोट किये, तोड़फोड़ मचाते कई गुंडों के चेहरे भी कैमरों में कैद हुए एवं टीवी समाचारों में दिखाए गए लेकिन उनका कुछ न बिगड़ा. वहीँ ठाकरे की शवयात्रा से उत्पन्न सड़क जाम पर एक टिप्पणी क्या एक लड़की ने जड़ दी, राज्य सरकार के शिवसैनिक गुंडों ने लड़की को गिरफ्तार करवाया एवं उसके डाक्टर चाचा की क्लिनिक को तोड़ फोड़ डाला. फेसबुक को लाइक करने वाली दूसरी लड़की को भी मुंबई प्रशासन ने दोषी माना.
    इधर, हरियाणा में पटेल आन्दोलन के जातिवादी गुंडों का नंगा नाच भी हम टीवी में कैद देख चुके हैं. और, तो और, जिस सीएम की सरदारी में गुजरात नरसंहार घटा वह लोकतंत्र में और बड़े कद का साबित कर दिया गया सांप्रदायिक जनता द्वारा. लोकतंत्र कहीं नहीं है भाईसाहेब! इस लोकतंत्र में कहीं कोई उम्मीद नहीं बची है भाईजान!

  2. डा मुसाफ़िर बैठा

    लोकतंत्र में धर्म-रोगियों को रोग फ़ैलाने का हक़ है चाहे वह किसी भी धर्म का हो! नाइक को भी फ़ैलाने दो! चुन-बीन क्यों रहे तुम लोगो?
    और, अपने धर्म की बीमारी एवं बीमार अच्छा और अपनी नापसंद के धर्म की बीमारी और बीमार बुरा, यह दोगला पैमाना भी नहीं चलना चाहिए!

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