कला-संस्कृति मंत्री को राहत, मिली जमानत

बिहार के नवनियुक्त कला संस्कृति मंत्री विनय बिहारी को एक मामले में जमानत मिल गयी है. वह एक मामले में आरा की अदालत द्वारा फरार घोषित किये गये थे.vinay.bihari

विनायक विजेता की रिपोर्ट

पश्चिम चंपारण के लौरिया विधानसभा से निर्दलीय विधायक सह भोजपुरी गीतों के गायक विनय बिहारी को आज आरा कोर्ट से राहत मिल गई। आरा के एसडीजेएम किशोरी लाल की अदालत ने विनय बिहारी को पांच हजार के दो जमानतदारों द्वारा जमानत लेने की शर्त पर उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी।

जीतन राम मांझी सरकार में कला-संस्कृति मंत्री बनाए गए विनय बिहारी मंगलवार को सुबह दस बजे आरा कोर्ट में हाजिर हुए जहां उनके वकील मनोरंजन कुमार सिंह ने एसडीजेएम किशोरी लाल सिंह की अदालत में उनके जमानत आवेदन पर बहस की।

आरोपित मंत्री के अधिक्ता की दलील सुनने के बाद एसडीजेएम ने दो स्थानीय जमानतदारों द्वारा पांच हजार का बेल बांड भरने की शर्त पर विनयबिहारी को जमानत प्रदान कर दी। सूत्रों के अनुसार विनय बिहारी की आरा में रिश्तेदारी भी है और उनके दो रिश्तेदार ही उनके जमानतदार बने हैं।

अदालत की नजर में थे फरार

गौरतलब है कि जीतन राम मांझी सरकार में शामिल लौरिया के निर्दलीय विधायक सह कला संस्कृति मंत्री विनय बिहारी आरा की एक अदालत द्वारा फरार घोषित थे।

विनय बिहारी सहित 13 लोगों पर वर्ष 2008 में आरा निवासी सह भोजपुरिया समाज के अध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह ने आरा के सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद पत्र (448/2008)दायर किया था। यह परिवाद पत्र विनय बिहारी व अन्य द्वारा टी-सीरीज कंपनी द्वारा निकाले गए होली के भोजपूरी गीत के एक कैसेट व सीडी ‘फटाफट डालेला’ के खिलाफ दायर किया गया था जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि इसमें अश्लीलता परोसी गई है।

 

इस मामले में तब बिनय बिहारी, टी-सीरीज कंपनी के निदेशक दर्शन कुमार, गायक राधेश्याम रसिया,, खुशबू जैन, शोभा मिश्रा, महेश परदेशी, लवली शर्मा, जप्पन जाफरी, राकेश राज, काजल, खेसारी लााल यादव एवं शौलेश सागर को आरोपित किया था। इस मामले में आरा की अदालत ने 6 जुलाई 2010 को संज्ञान लेते हुए सभी अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में हाजिर होने का सम्मन जारी किया। इस मामले में अदालत में शुरू हुए ट्रायल संख्या 1611/2011 में अभियुक्तों के अदालत में हाजिर नहीं होने की स्थिति में पहले अदालत ने जमानतीय वारंट और फिर 29 जून 2012 को गैरजमानतीय वारंट जारी किया। इसके बावजूद जब आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो अदालत ने सारे आरोपितों को फरार मानते हुए 16 जलाई 2013 सारे आरोपितों की संपत्ति कूर्क करने का आदेश जारी किया।

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