“कांग्रेसियों की शक्ल देख कर ही घृणा आती है”

बॉलीवुड के अभिनेता व गायक पियूष मिश्रा को कांग्रेसियों की शक्ल देख कर ही घृणा आने लगती है और वह अपनी गाली को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं.पढ़ें पूरा साक्षात्कारpiyush

पियुष, अभिषेक आनंद से बात करते हुए कहते हैं कि जब सबके सर पर कलंक लगे हैं तो मोदी को एक बार मौका देकर देखना चाहिए. गुलाल और गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म में शानदार अभिनय करने वाले पियूष गुजरात में मुसलमानों के साथ हुए नाइंसाफी के सवाल पर कहते हैं ‘एन्काउंटर पूछ कर नहीं होता कि आप आतंकवादी हैं. फिर कहते हैं, वह सब छोड़ो. बड़ा हित देखो. देश चल रहा है कि नहीं.

आवाज सुने

https://soundcloud.com/afrozsahil/piyush-4

https://soundcloud.com/afrozsahil/piyush-1?in=afrozsahil/sets/talk-with-piyush-mishra

इतना करप्शन है, इतना हल्ला है, यह देश कैसे बदलेगा ?

नहीं बदलेगा. अभी चलने दो जो चल रहा है. महाभारत हुआ था न. मृत्युंजय नोवल में कृष्ण का स्टेटमेंट है. बहुत बढ़िया नोवल है. उसमें उनका कहना था कि मानव जाति की हालत जब खराब होती है तो आप रोक नहीं सकते, तो मरने देना चाहिए. इसके लिए बड़े ध्वंस की जरूरत होती है. अभी यहीं होने वाला है…

आप थोड़ी देर पहले कह रहे थे केजरीवाल को वोट देना चाहिए ?
मेरे ख्याल से देना चाहिए.

सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि केजरीवाल को वोट देना चाहिए ?
हां, हां। क्यों नहीं…

कांग्रेस-बीजेपी को नहीं देना चाहिए ?

“कांग्रेस को तो नहीं ही देना चाहिए. बीजेपी को देखो. मतलब उनके ऊपर लाख धब्बे लगे. नरेंद्र मोदी के ऊपर लाख धब्बे लगे. ये मेरा दोस्त है संजीव भट्ट. अहमदाबाद के आईपीएस. मेरे बड़े अच्छे दोस्त हैं. मेरा यही कहना है कि चलो यार. सबके सर पर कलंक है. एक बारगी देकर देखते हैं.

किसे बीजेपी को ?

“मोदी को. जैसा होगा, गंदा होगा सामने आ जाएगा. लेकिन इतना बच बच के नहीं चल सकते. आज कोई नहीं है कहने वाला कि केजरीवाल बहुत शरीफ आदमी है. आज के तारीख में ऑप्शन जो हैं उनमें से देखना पड़ेगा. दो… किसी को तो लाओ. कौन है काबिल? क्या-क्या नहीं हो रहा है देश में…

एक बार कह रहे हैं केजरीवाल को फिर बीजेपी को ?

दिल्ली (राज्य सरकार) में केजरीवाल मेरे ख्याल से डिजर्व करता है. पता नहीं स्टेट चला पाएगा कि नहीं. क्योंकि स्ट्रेंथ कम है.

मोदी के बारे में आलोचक कहते हैं कभी माफी नहीं मांगी ?

नहीं मांगी, नहीं मांगी. आलोचकों से पूछो बीवी को चांटा मारने के लिए माफी मांगी कभी. कौन बंदा है जिसने गलती नहीं की. ठीक है उसने बहुत बड़ी गलती की है. मैं तो गोधरा गया था बाकायदा. (गाली के कुछ शब्द बोल कर संभलते हुए…..) कांग्रेसियों की शक्ल देखकर घिन आती है. एक ही परिवार क्यों चलाए. पंडित नेहरू हो गएं ठीक है. फिर मैडम आ गई. बेटा आ गया…. ( फिर अपश्बद पर नियंत्रण करते हुए) बड़ा बेटा आया. छोटा बेटा आया. बीवी आ गई.

सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं, दिक्कत नहीं होगी ?

दिक्कत क्या होगी. होती रहती है. गुलाल आई थी. साइडलाइन कर दी गई थी. नेशनल अवार्ड में से. बिल्कुल देखा भी नहीं. (कुछ देर रुककर…) जिंदगी खेल है. इतना हल्का फुल्का. जितना गंभीरता से लोगे उतना परेशान करेगी. आप बदकारी मत पालो किसी के लिए. आपसे गंदी हरकत न हो जाए इसके लिए अलर्ट रहो. हो भी जाती है, गलती हो ही जाती है, तो उसे रियलाइज कर लो.

फिर मोदी ?

मोदी ने माफी नहीं मांगी उसकी गलती है. लेकिन माफी मांगता है तो बहुत बड़ा कांड हो जाएगा. ऐसी स्थिती में है. हो सकता है आने वाले समय में पीएम बन जाए. हो सकता है वह माफी मांग चुका हो. किसी सम्मानित व्यक्ति के पास जाकर. सम्मानित व्यक्ति के पास जाकर गलती बताने पर सबसे ज्यादा बोझ हल्का होता है.

मोदी को आप जीता रहे हैं ?

मैं नहीं जीता रहा. मेरे ख्याल से जीतेगा. मैजिक फीगर आना मुश्किल है. गठबंधन करना पड़ेगा. लेकिन दो यार मौका दो. देखते हैं न. वरना कोई विकल्प नहीं है. इस पप्पू को स्साले को पीएम क्या… पीएम का झाडू लगाने लायक नहीं है… देश चला सकता है मोदी.

आपके मुताबिक जो दिल्ली की राज्य सरकार में पिछली बार काम नहीं किया, वह देश अच्छे से चलाएगा?

मुझे मालूम नहीं चलाएगी या नहीं. कांग्रेस नहीं कर रही. दो ऑप्शन है. फिर थर्ड फ्रांट है. उसके मुखिया बनेंगे महाचोर मुलायम सिंह. सीपीएम में कोई है नहीं. एक थे तो सुरजीत. गुजरात संभालने और देश संभालने में बड़ा फर्क है. मैं जानता हूं. लेकिन ये कांग्रेस कुछ नहीं कर पा रहे हैं न यार. यू टेल मी ऑप्शन… आंतकी गर्त में ला दिया. क्या ऑप्शन है ? मैं पक्षधर नहीं हूं मोदी का. लेकिन किसी का भी पक्षधर होउंगा ना.

मुसलमानों के साथ हुआ, उसका क्या होगा ?

मालूम नहीं क्या होगा. अरे बड़ा सॉरी आपको. ये बता दूं कि जंग होती है तो उसमें पूछ के एनकाउंटर नहीं होता. कि आप टेरोरिस्ट हैं या नहीं? 50 लोग पंजाब बचाएं न. ऐसे ही बचाए. वो सुपर कॉप जो नाम था उसने होम मिनिस्ट्री से यहीं कहा कि मुझे पूरी छूट चाहिए. गुजरात में वैसे हालात थे? यहां पर वैसे हालात थे. वहां पर ऐसे हालात थे. अभी भूलना पड़ेगा. बड़ा हित देखो. देश संभल रहा है या नहीं. बात खत्म हो गई. समाजवादी पार्टी मुसलमानों की चिंतक थी न. वहां पर कैंप में खड़े हैं 50 हजार लोग. ये तो मुसलमान के वोट पर ही जीती थी. आज़म खां, ये और वो. इसका मतलब कोई भी कुछ नहीं कर रहा. इसका मतलब आने दो, जो कम से कम एक चीज जानता है.

अभिषेक आनंद अभी हाल तक पटना हिंदुस्तान में थे. अब दिल्ली में हैं. उनसे 09608731320 पर संपर्क कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*