काटजू : 4 बयान जिनसे मचा घमासान

काटजू के बयान से क्यों मचता है घमासान? ताजा मामला द हिंदू में उनके लेख को लेकर है जिसमें उन्होंने मोदी को निशाना बनाया. आइए देखते हैं प्रेस काउंसिलके चेयरमैन मार्कंडे काटजू के चार विवादस्पद बयान जिनसे देश में घमासान मच गया.

अनिता गौतम

मोदी पर

“2002 में गुजरात के मुसलमानों का संहार और उनपर किये गये जुल्म को न तो कभी भुलाया जा सकता है और न ही इसके लिए नरेंद्र मोदी को कभी माफ किया जा सकता है. अरब जगत का सारा इत्र( खुश्बू) से भी अगर धो दिया जाये तो मोदी के ऊपर लगे धब्बे को नहीं धोया जा सकता”( 15 फरवरी, 2013)

नीतीश पर

“नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अगर पत्रकार कुछ लिखते हैं तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है. हमें बिहार के संदर्भ में जो सूचनायें मिली हैं वह अच्छी नहीं हैं. नीतीश कुमार इस बात को याद रखें कि उनका यह आचरण भारतीय संविधान का उल्लंघन हैं”. 25 फरवरी, 2012

देश की जनता पर

“भारत के 90 प्रतिशत लोग मूर्ख हैं, जिन्हें आसानी से किसी भी दिशा में हांका जा सकता है. और यही कारण है कि उत्पाती किस्म के लोग आज भी साम्प्रदायिक दंगे भड़काने में सफल हो जाते हैं’.
इस बयान के आधे हिस्से को( कि भारत के 90 प्रतिशत लोग मूर्ख हैं) पर हंगामा खड़ा कर दिया. 29 नवम्बर, 2012

और ममता पर

‘ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के रूप में ज्यादा दिन नहीं चल सकतीं. पश्चिम बंगाल की जनता उनकी(ममता) तानाशाही को बर्दास्त नहीं कर सकती. मैंने अपने हालिये दौरे( पश्चिम बंगाल) में पाया है कि मंत्री और अधिकारी इतने डरे सहमें और आतंकित रहते हैं( ममता से) कि वे अपने दिल की आवाज भी नहीं सुना सकते”. 8 नवम्बर, 2012

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