कान खोल के सुन लीजिए जेएनयू ही आपकी कब्रगाह बनेगा

 कर्मेंदु शिशर बता रहे हैं कि एबीवीपी के लोग पाकिस्तान जिंदाबाद का नारे लगाने वाले और मीडिया संग साजिश रचने वाल  जेएनयू से वामपंथ समाप्त करना चाह रहे हैं लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि जेएनयू ही उनकी कब्रगाही बनेगा.JNU.protest

कांग्रेस ने तो जेएनयू जैसी विश्व विख्यात केंद्र बना दिया आपमें कूवत है तो एक भी ऐसी संस्था खड़ी कर दिखा तो दे?नहीं आप तो बने– बनाये को चौपट कर रहे है.वीसी की बनाई कमिटी की बिना रिपोर्ट आये कन्हैया को आतंकवादी बता मक्खी पर तोप चला रहे जब कि वह लगातार इन नारो का विरोध कर रहा है कह रहा है आपने मीडिया के साथ साजिश कर गलतफहमी फैलाई और जब गिलानी ने सचमुच एलानिया चुनौती दे दी है कि आप एक भी कश्मीरी को पकड़ कर तो दिखाए?सटक गये ?

 

ऐसे भी वीडियो वायरल है जिसमे एबीवीपी वाले ही देश विरोधी नारे लगा रहे है.इसे मीडिया वाले क्यों नहीं दिखाते?अब आपका और मीडिया का भी भेद खुल गया है,सब खुला खेल है,इस तरह एबीवीपी को कभी भी विश्वविद्यालयों में काबिज नहीं करा सकते.

इन सवालों का क्या उत्तर है कि आपका वीसी अनुमति देता है और15 मिनट पहले वापस ले लेता है क्यों ? जब उसे पता चल गया कि हाफिज के लोग आने वाले है तो उसने पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया.?जब चार दिन पहले से पोस्टर लगे थे तो इंटेलिजेंस क्या कर रहा था? कश्मीर से आतंकी आये गोष्ठी में शामिल हुए नारे लगाये और चले गये तब 3 दिन तक देशभक्त पुलिस क्या कर रही थी?

वामपंथ निशाना

आपका निशाना सिर्फ वामपंथी छात्र है?नारों के समय मीडिया की उपस्थिति इसलिए संदिग्ध है कि ऐसे भी वीडियो वायरल है जिसमे एबीवीपी वाले ही देश विरोधी नारे लगा रहे है.इसे मीडिया वाले क्यों नहीं दिखाते?अब आपका और मीडिया का भी भेद खुल गया है,सब खुला खेल है,इस तरह एबीवीपी को कभी भी विश्वविद्यालयों में काबिज नहीं करा सकते.

 

आप तमाम विश्वविद्यालयों को मटियामेट करना शुरू कर दिए हैं यह आपकी कब्र का कील हो जाएगा.साहित्य से इतिहास तक ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में आज तक एक भी ऐसा नाम है जो आपकी विचारधाराने पैदा किया?पुराण को इतिहास समझने वाले चले हैं विश्वविद्यालय रौंदने ?पूरे देश के बुद्धिजीवी अब उबल रहे हैं यह सौदा आपको बहुत भारी पड़ेगा

One comment

  1. आतंक, भारत में दो तरह की संस्कृति है एक शोषण की संस्कृति या मनुवाद जिसका पोषण ब्राह्मण और पूंजीपति वर्ग करता और दूसरी बराबर की संस्कृति या अम्बेकवाद जिसका अनुयायी दलित शोषित अल्पसंख्यक वर्ग करता है/ इस समय ये तय करने की आवश्यकता है कि देशद्रोही कौन ? और देशप्रेमी कौन ? इसकी क्या परिभाषा हो / मनुवादी या अम्बेकवादी

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