काले धन को सफेद बनाने वाले बैंकों पर मेहरबानी तो नहीं?

कोबरा पोस्ट के स्टिंग में मनी लॉंड्रिंग के दोषी बैंकों के निदेशकों के बजाये छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत रिजर्व बैंक ने दिये हैं जबकि ऐसे मामलों में रिंग लीडर की पकड़ होनी चाहिए.

सुब्बाराव

सुब्बाराव

कोबरा पोस्ट ने एचडीएफसी, आईसीआसीआई जैसे बड़े निजी बैंकों द्वार काले धन को सफेद बनाने और उन्हें विदेशों में पहुंचाने का पर्दाफाश किया था. रिजर्व बैंक ने इसकी जांच पूरी कर ली है. पर रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा है कि इस मामले में सबसे पहले व्यक्तिगत स्तर पर उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, जो इस तरह की गड़बड़ी में शामिल हुए और जिन्होंने बैंकिंग के नियमों का उल्लंघन किया.

पर रिजर्व बैंक यह क्यों भूल जाता है कि इस तरह की गड़बड़ियां करने वाले संबंधित अधिकारी तालाब की छोटी मछलियां हैं जो अपने आला अधिकारियों के इशारों-दबावों पर काम करते हैं. अगर छोटे अधिकारी अपने मालिकान के अघोषित टार्गेट को पूरा न करें तो उन्हें वैसे भी नौकरियों से निकाल दिया जाता है. ऐसे में रिजर्व बैंक को यह समझना चाहिए कि इस घोटाले का रिंग लीडर निदेशक स्तर के अधिकारी होते हैं.

हां रिजर्व बैंक गलत करने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करे, पर यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसकी कार्रवाई की गाज सिर्फ उन्हीं अधिकारियों तक सीमित न रहे जो प्रत्यक्ष तौर पर इसमें शामिल हैं, बल्कि उन्हें भी जरूर पकड़ा जाना चाहिए जो अपने मातहत अधिकारियों को ऐसे गैरकानूनी काम करने केलिए दबाव बनाये रखते हैं.

यह बात जगजाहिर है कि बैंककर्मियों को अपने टार्गेट पूरा करने के लिए भारी दबाव में रहना पड़ता है. ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें यह पाया गया है कि टार्गेट पूरा नहीं करने वाले कर्मियों को नौकरियों से भी हटा दिया जाता है, चाहे वह काम कानूनी हो या गैर कानूनी.

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने श्रीनगर में जो बातें कहीं उससे कई तरह के संदेह पनपते हैं. मनी लांड्रिंग में संलिप्त पाए गए बैंकों पर पेनाल्टी लगाने या अन्य कार्रवाई करने के सवाल पर राव ने कहा कि इन चीजों के निर्धारण लिए हमें एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा.दोषी बैंकों पर कार्रवाई की कोई स्पष्ट समय सीमा न बताते हुए उन्होंने कहा कि कई तरह की प्रक्रियाएं इससे जुड़ी हुई हैं, ऐसे में र्कारवाई के लिए कोई तयशुदा समय सीमा बता पाना संभव नहीं है.

सुब्बाराव के बयान से मनी लॉंड्रिंग में शामिल बैंकों के खिलाफ कार्रवाई पर आरबीआई के साफ्ट रवैये की झलक मिलती है.

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