कितने लाभकारी होंगे चिदम्बरमी तरकश के ये तीर?

एक नयी पारी की शुरूआत के लिए इन्हें खुद पी चिदम्बरम ने चुना है.ऐसे समय में जब केंद्र सराकर एक ऐसा बजट बनाने के फिराक में है जो 2014 के आम चुनाओं में उसकी नैया पार लगा दे.

राजीव टकरू : एक नई पारी की शुरूआत

चिदम्बरम की पसंद विजय टकरू ने वित्त मंत्रालय में सचिव की हैसियत से अपना पद संभाल लिया है.

आखिर गुजरात कैडर के 1979 बैच के इस आईएएस अधिकारी से चिदमबरम ने क्या उम्मीदें लगा रखी है?

संदेह नहीं कि केंद्र की कांग्रेस सरकार के पास मतदाताओं को अपनी तरफ आकर्षित करना मौजूदा स्थिति में बड़ी चुनौति है.पर उसे उम्मीद है कि डायरेक्ट कैश ट्रांस्फर स्कीम, उसके लिए अलाउद्दीन का जादुई चिराग साबित हो सकता है.कहा जा रहा है कि चिदमबरम को भरोसा है कि टकरू उनकी इस स्कीम को प्रभावी तरीके से आम जन तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

पेशे से इंजीनियर रहे टकरू को वैसे तो काफी प्रशासनिक अनुभव है पर उनका रिश्ता विवादों से भी रहा है.वह पिछले दिनों सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय से भी जुड़े रहे.यहां टकरू का कार्यकाल काफी विवादित रहा है. प्रसार भारती के सीईओ रहते हुए उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने दूरदर्शन में उर्दू कार्यक्रमों में कटौती भी की थी जिससे उनपर उर्दू विरोधी होने का आरोप भी लगा था.यह भी बताया जाता है कि तब टकरू गुजरात में थे तो 2002 के दंगों के बाद टकरू गुजरात की राजनीति के शिकार हो गये थे.और इससे तंग आकर उन्होंने गुजरात छोड़ दिल्ली आना उचित समझा था.

हालांकि कुछ लोग टकरू को एक कार्यकुशल अधिकारी मानते हैं और लोगों का कहना है कि गुजरात के 2001 के भूकम्प में टकरू ने अच्छा काम किया था और भूकम्प राहत कार्यों में उन्होंने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को उजागर किया था.

टकरू इससे पहले राष्ट्रीय फैसन संस्थान में महानिदेशक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. 1988 और 1992 के दौरान चार सालों तक टकरू गुजरात के राजकोट और जामनगर जिलों में डीएम भी रहे. अब जबकि टकरू अपने करियर के अंतिम दिनों में हैं देखना है कि वह कांग्रेस सरकार को अपनी कार्यकुशलता से कितना खुश कर पाते हैं.

वैसे इस बात में कोई संदेह नहीं कि वह अपनी काबलियत का भरपूर इस्तेमाल नहीं करेंगे क्योंकि सितम्बर 2015 में जब वह रिटायर होंगे तो उसके बाद की नई पारी की शुरूआत के लिए उन्हें अभी से तैयारी करनी पड़ेगी क्योंकि रिटायरमेंट के बाद किसी आयोग, निगम या बोर्ड में जगह सुनिश्चित करना उनकी कार्यकुशलता और सरकार से उनके मधुर रिश्तों पर ही निर्भर करता है.

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