कुरियन में क्या बात थी कि उन्हें भारत रत्न दिया जाये?

वर्गिज कुरियन ने केरल में अपना घर-बार त्याग कर दुग्ध कोआपरेटिव आंदोलन को ऊचाइयां देने के लिए कूद पड़े. इस आंदनोल ने लाखों ग्रामीणों की जिंदगी बदल कर रख दी. इस आंदोलन ने महिलाओं को सशक्त किया और लोगों को आर्थिक रूप से सम्पन्न बना दिया.

इतना ही नहीं वर्गिज के प्रयासों ने अमूल को भारत का सबसे बड़े ब्रांडों में से एक बना दिया. उनके इस योगदान के कारण देश भर में लोगों ने उन्हें भारत रत्न से नवाजने की मुहिम को तेज कर दिया है.
कुरियन का देहांत हाल ही में 90 साल की उम्र में हो गया.

आखिर कुरियन में ऐसी क्या बात थी कि उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए? और क्यों इनको यह सम्मान देने के लिए एक अभियान की शुरूआत की गई है?

इस अभियान को सफल बनाने और उनके योगदान के बारे में लोगों को बताने का प्रयास के तहत देश की अनेक जानी मानी हस्तियों ने पहल की है. इनमें शेखर कपूर, सुहेल सेठ,मीरा सान्याल, राजदीप सरदेसाई, महेश मूर्ती जैसे लोग शामिल हैं.

भारत रत्न के हकदार कुरियन का योगदान-

1. उनकी दृष्टि व्यापक थी. कुरियन ने दूध की किल्लत झेल रहे भारत को कुछ ही वर्षों में दुनिया का सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश बना दिया. और उन्होंने यह काम कोआपरेटिव आंदोलन के जरिये संभव कर दिखाया. इससे लाखों ग्रामीणों और महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक जिंदगियों में तब्दीली आई.

2 ऐसा करते हुए उन्होंने देश के लाखों बच्चों को, जिनको दूध जैसे आहार की जरूरत सबसे ज्यादा है, दूध मुहैया कराने में भूमिका निभाई

3. सफेद क्रांति- यह एक सामाजिक प्रयोग के तौर पर शुरू की गई छोटी से शुरूआत थी जो आगे चल कर मार्केटिंग के अंतरराष्ट्रीय नियमों को चुनौती देने में सफल रहा और देश को दूध के मामले में आत्मनिर्भर बना दिया.

4. कुरियन के प्रयासों से अमूल आजाद भारत के सबसे बड़े ब्रांडों में से एक बन गया. अमूल के ब्रांड में अमूल गर्ल वाली पहचान गढ़ी जो पिछली आधी सदी से भारत के सर्वोत्तम ब्रांड की हैसियत में बना हुआ है.

5. कुरियन के अंदर प्रतिभाओं को पहचानने की अद्भुत क्षमता थी. और उन्होंने ऐसी प्रतिभावों को अवसर प्रदान कर के भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

6. अमूल के निर्माण, उसके विकास के क्रम में कुरियन ने यह साबित कर दिखाया कि कारोबार को सिर्फ लाभ और व्यापार को मद्देनजर रख कर ही आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है. इसका नतीजा था कि अभाव की स्थिति से उबार कर एक समय में उन्होंने अमूल को दो हजार करोड़ की परिसम्पत्ति तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की.

7. कुरियन ने गुजरात मिल्क कोआपरेटिव फेड्रेशन और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड और अमूल जैसे ब्रांड को तब विकसित किया जब भारत एक बंद और प्रतिबंधित अर्थव्यवस्था वाला देश था.
8. अमूल जैसा ब्रांड पिछले पचास सालों में निजी क्षेत्र में भी विकसित नहीं हो सका.

9 कुरियन भारत रत्न के असली हकदार इसलिए भी हैं कि पिछले पचास सालों में उन जैसा शायद ही कोई और व्यक्ति है, जिसने इतनी बड़ी संख्या में साधारण ग्रामीण परिवारों की जिंदगियों को प्रभावित किया.

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