कैडर, नन कैडर का घनचक्कर और गरिमा गुप्ता

2004 बैच की आईएएस अधिकारी गरिमा गुप्ता अपने कैडर पोस्टिंग के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करने वाली अधिकारी का नाम है. इस बार वह अरुणाचल प्रदेश परिवहन विभाग की सचिव बनायी गयी हैं.

गरिमा गुप्ता

गरिमा गुप्ता

इससे पहले गरिमा लेबर डिपार्टमेंट में सचिव थीं. गरिमा अपने 9 साल के करियर में अपने कैडर के प्रति काफी सचेत और अपने हक के लिए संघर्ष करने में पीछे नहीं रहतीं.

2010 में गरिमा आठ महीने तक कैडर पोस्टिंग के इंतजार में रहीं. उन्होंने किसी नन कैडर पोस्ट में जाने से मना कर दिया था. लम्बे इंतजार उन्हें गवारा था पर नन कैडर पोस्ट पर जाने को कतई तैयार नहीं थीं.

उन्हें 2008 में गृहमंत्रालय ने गोआ ट्रांस्फर कर दिया था. पर इस शर्त के साथ कि उन्हें कैडर पद पर प्रोमोशन दिया जायेगा.

गरिमा को 2009 में शिक्षा विकास निगम का प्रबंधनिदेशक बनाया गया पर वह महज तीन महीने काम करने के बाद मैटरनिटी लीव लेकर चली गयीं. वह कुल 9 महीने तक छुट्टी पर रहीं.
जब वह 9 महीने बाद लौंटी तो फिर से कैडर-नन कैडर के घनचक्कर का शिकार होती रहीं.जब वह वापस आयीं तो उन्हें फिर से एक नन कैडर पोस्ट पर भेज दिया गया. उन्हें रिवर नेविगेशन का निदेशक बनाया गया. यह पद भी नन कैडर था. लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इस पद पर ज्वाइन करने से इनकार कर दिया कि वह नन कैडर पोस्ट है.

इसके बाद गरिमा को गोआ के महिला व बाल विकास आयोग का सचिव बनाया गया, पर यह पद भी नन कैडर थ. यह आयोग महिला एंव बाल विकास निदेशालय के अधीन था.

इसलिए उन्होंने फिर इस पद पर ज्वाइन करने से इनकार करते हुए मुख्यसचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय में अपनी आपत्ति दर्ज करायी. उनका तर्क था कि अनेक कैडर पद खाली रहने के बावजदू उन्हें नन कैडर पद पर भेजा जा रहा है जबकि नियमानुसार ऐसा मात्र तीन महीने के लिए ही किया जा सकता है.

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