कोचिंग नीति:सरकार और संस्थानों को माल,छात्र बेहाल

दो साल पहले मचे अत्पात के बाद बिहार में फिर किचिंग संस्थानों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है जबकि कोचिंग नीति के नाम पर सरकार खजाना भर रही है और टैक्स के नाम पर संस्थानों ने फिस बढ़ा दी है.

अभिषेक आनंद

सरकारी नीति और कोचिंग संस्थानों के शोषण का खमियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है.

हालांकि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कोचिंग नीति बनाई है पर इस पर आज तके अमल नहीं हुआ है.सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेज से पता चला है कि अभी तक सरकार ने किसी भी कोचिंग संस्थान के खिलाफ कोई कार्रावई नहीं की है.

2010 में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ उग्र हुए थे छात्र(साभार- व्यू पटना)

बिहार सरकार ने 2010 में नई कोचिंग नीति बनाने का फैसला किया था.अब इस कोचिंग नीति के आड़ में ही छात्रों के साथ धोखाधड़ी करने के सवाल उठने लगे हैं.जबकि क्वालिटी शिक्षक, उचित फीस, निर्धारित समय में सिलेबस की पढ़ाई, शिक्षक-छात्र अनुपात सहित कई सुविधाए उपलब्ध कराने के लिए कोचिंग नीति बनाई गई थी.

छात्र संगठनों का आरोप है कि कोचिंग नीति से छात्रों को लाभ होने के बजाए नुकसान हो रहा है. कोचिंग नीति बनने के बाद सरकार को टैक्स चुकाने के नाम पर संस्थान छात्रों से दोगुनी-तीगुनी फीस वसूल रहे हैं. एआईएसएफ के राज्य सचिव विश्वजीत कहते हैं, ‘कोचिंग संस्थानों ने छात्रों के लिए न क्वालिटी शिक्षकों की नियुक्ति की और न ही छात्र-शिक्षक रेशियो को ठीक किया. सिलेबस भी तय नहीं हुआ.’

अपंजीकृत संस्थानों पर कार्रवाई नहीं

नई नीति बनने के बाद राज्य में ढाई साल के दौरान एक भी कोचिंग संस्थान पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की. कोचिंग नीति लागू करने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले संस्थानों पर कार्रवाई होनी थी. रजिस्ट्रेशन में कोचिंग संस्थानों के लिए नियम और शर्तें भी तय होनी थीं.एक आरटीआई के जवाब में राज्य मानव संसाधन विभाग ने कोचिंग नीति के पालन कराने या इसको लेकर किसी तरह की कार्रवाई करने की सूचना नहीं होने की बात कही है.

उधर, जिला शिक्षा पदाधिकारी पटना के मुताबिक राजधानी में महज 221 संस्थानों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया. इनमें से 180 संस्थानों का रजिस्ट्रेशन हुआ और 41 कोचिंग संस्थानों के आवेदन खारिज कर दिए गए. आश्चर्यजनक रूप से पटना से सटे वैशाली जिले में महज एक कोचिंग का रजिस्ट्रेशन हुआ. वहीं भागलपुर में 47 कोचिंग संस्थानों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया था लेकिन एक भी संस्थान का रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है.

फीस में कई गुना इजाफा

छात्रों का आरोप है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है और कोचिंग संस्थान और राज्य के शिक्षा माफियाओं को दोहरा लाभ देने की कोशिश हो रही है. एक तरफ शिक्षा माफियाओं ने फीस में बेतहाशा वृद्धि कर दी है दूसरी ओर खुद को रजिस्ट्रेशन कराकर पाक साफ दिखा रहे हैं. लेकिन सरकार कोचिंग नीति पालन नहीं करने वाले संस्थानों को छू भी नहीं रही है.

कोचिंग नीति को पालन कराने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी. इसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी को सचिव, एसपी और स्थानीय कॉलेजों के प्रिंसिपल को सदस्य बनाया गया था. लेकिन किसी भी स्तर पर नीति को पालन कराने के लिए इनिशिएटिव नहीं ली गई. पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई भी नहीं हुई. इस तरह नियम की धज्जियां उड़ाए जाने से आम छात्रों में संदेश गया कि सरकार कार्रवाई करना ही नहीं चाहती.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी शहर के कई प्राइवेट कोचिंग संस्थानों का हाल के दिनों में उद्घाटन करने पहुंचे हैं. इससे समाज में यह संदेश भी जाता है कि सरकार ही प्राइवेट संस्थानों के साथ खड़ी है.

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