कोयले पर निर्भरता बिजली संकट का समाधान नहीं

ग्रीनपीस ने एक कोयले पर निर्भरता बजाये अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के मकसद से एक अप्रैल को दिल्ली विधान सभा के सामने प्रारदर्ज्यशन किया.

राज्य में गर्मी के इस मौसम में बगैर किसी व्यवधान के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये और बिजली संकट से आगाह किया गया.

दिल्ली के कई इलाकों में गर्मी की शुरुआत होते ही अनिर्धारित समय पर बिजली कटौती शुरू हो गई है. ज्ञात हो की पिछले साल ही ग्रिड फेल होने की घटनाओं ने संकेत दे दिया था कि जीवाश्म ईंधन और कोयले पर आधारित बिजली बहुत भरोसे लायक नहीं है और यह कभी भी धोखा दे सकती है।साथ ही साथ यह भी संकेत मिलता है कि जीवाश्म ईंधन से मिलनेवाली बिजली के दिन अब पूरे हो रहे हैं।

विकास की गति बनाये रखने के लिए अब सस्ता कोयला भी मिलना संभव नहीं रहा। इसकी जो सामाजिक आर्थिक कीमत हमें चुकानी पड़ रही है वह हमारे विकास प्रक्रिया पर भारी पड़ रही है। दिल्ली को अपनी बढ़ती उर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक उर्जा के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ग्रीनपीस के सीनियर एनर्जी कैम्पेनर अभिषेक प्रताप ने कहा इस साल के अंत में चुनाव का सामना करने जा रही राज्य सरकार और खास तौर पर अप्रत्याशित रूप से लगातार चौथी बार कार्यकाल संभालने की तैयारी में जुटी मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि बिजली के संकट का समाधान कोयले जैसी तकनीकों पर निर्भरता बढ़ाकर नहीं होगा.

ये तकनीकें महंगी हो रही हैं. इसलिये बिजली संकट के हल और राज्य में टिकाऊ और दीर्घकालिक ऊर्जा संरचना के लिये अक्षय ऊर्जा के स्त्रोतों जैसे सौर, बायोमास में निवेश को बढ़ाना होगा.

दिल्ली में तीन चौथाई बिजली अन्य राज्यों में स्थित कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट से आती है. बीते साल अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कोयले का दाम बढ़ने की वजह से 32 मुख्य पावर प्लांट और दिल्ली को बिजली की आपूर्ति करने वाले पांच पावर प्लांट ने कोयले की कमी का सामना किया. इसके चलते आठ सौ मेगावाट बिजली के उत्पादन में कमी आयी. दूसरी ओर ठीक इसी वक्त सौर और पवन ऊर्जा संयंत्र ने अनुमान से अधिक बिजली उत्पादन किया. हालांकि दिल्ली देश के उन चुनिंदा राज्यों में से है जिनके पास वैकप्लिक ऊर्जा के स्त्रोतों जैसे-पवन, सौर और बायोमास का उपयोग करने की कोई नीति नहीं है.

ठोस नीति और योजना के अभाव के चलते ही बीते साल राज्य सरकार निर्णायक मौके पर इन वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का उपयोग करने में सफल नहीं हो सकी थी. बिजली के संकट से जूझ रहे राज्य को राहत देने के लिये और लोगों इस गर्मी में भरोसा देने के लिये मुख्यमंत्री द्वारा पेश किये गये बजट में कोई विश्वासी कदम नहीं उठाये गये हैं.

कैम्पेनर अभिषेक प्रताप ने कहा- “राज्य की मुख्यमंत्री और उनके ऊर्जा सलाहकार भ्रम में जी रहे हैं. ऐसा लगता है कि वे बीते अनुभवों से कोई सबक लेना नहीं चाहते और एक बार फिर बिजली संकट की स्थिति पैदा होने का इन्तजार कर रहे हैं. राज्य सरकार को लोगों में विश्वास पैदा करने के लिये किसी वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोत पर आधारित ठोस ऊर्जा योजना को तैयार करना चाहिये”.

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