कोर्ट की निगरानी में हो पनामा पेपर्स की जांच

कांग्रेस ने पनामा पेपर लीक मामले में नए खुलासे होने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमनसिंह तथा उनके सांसद पुत्र अभिषेक सिंह का इस्तीफा मांगा और मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग दोहरायी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नर्इ दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में आयोजित विशेष संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इसकी जांच का काम वित्त मंत्रालय के अधीन एजेंसियों को देने से निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती।

 

 

श्री रमेश का कहना था कि खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली इन खुलासों के कारण संदेह के घेरे में हैं, इसलिए उनके मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसियों द्वारा इस मामले की स्वतंत्र जांच की संभव ही नहीं है। इसलिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2001 में दिल्ली जिला एवं क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की तत्कालीन कानून मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली समिति ने खेल जगत के प्रमुख नाम लोकेश शर्मा की कंपनी इक्कीसवीं सेंचुरी को तीन साल के लिए अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान स्टेडियम का विज्ञापन देने का ठेके देने के लिए मशहूर खिलाड़ी चेतन चौहान को अधिकृत किया था। उनका कहना था कि जिस कंपनी को श्री जेटली की अध्यक्षता वाली समिति ने काम दिया,  उसका नाम पनामा पेपर लीक में आने के बाद मामले की जांच वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसियों से कराने से सही परिणाम सामने नहीं आएंगे।

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