के. सिद्दरमैया: वकालत से सियासत तक

के सिद्दरमैया सोमवार को कर्नाटक के 22वें मुख्यमंत्री बन गये हैं.आइए जानते हैं कि कौन है सिद्दरमैया.

सिद्दरमैया: चस हुआ सपना

सिद्दरमैया: चस हुआ सपना

जीवन में किस्मत का बड़ा योगदान है. 1996 में जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी देवेगौड़ा प्रधान मंत्री बन गये तो सिद्दरमैया वहां के मुख्यमंत्री बनते बनते रह गये थे. गोया कि तब उनकी किस्मत ने पलटा खाया था और उन्हें उस पद से वंचित रहना पड़ा था.

पर आज सबकुछ उनके साथ है. मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष जी परमेशवरा 5 मई के चुनाव में हार गये. परमेशवरा की हार ने सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया.वह कई बार कहते भी रहे थे कि एक दिन वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनके रहेंगे.

पिछड़ी जाति कुरबा से तालुक रखने वाले सिद्दरमैया विधानसभा में विपक्ष के नेता के अलावा राज्य के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं पर वह बहुत पुराने कांग्रेसी नहीं हैं.

12 अगस्त 1948 को मैसूर जिले में पैदा हुए सिद्दरमैया चरवाहा समुदाय के कुरबा जाति से आते हैं. उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से सायंस में ग्रेजुएशन किया और फिर बाद में इसी विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई पूरी की.

राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से प्रेरित सिद्दरमैया शुद्ध समाजवादी धारा के नेता है. जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत वकालत से की. 1083 में पहली बार वह लोकदल के टिकट से विधानसभा पहुंचे थे. बाद में वह जनता पार्टी में शामिल हो गये जो बाद में जनता दल के रूप में सामने आया.

1999 में जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष बनाये गये.2004 में कांग्रेस-जदएस की गठबंधन सरकार में सिद्दरमैया जदएस कोटे से उप मुख्यमंत्री थे.

पर 2005 में सिद्दरमैया को जनता दल एस से हटा दिया गया इस समय एचडी देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमार स्वामी की पार्टी में तूती बोलने लगी थी. कुछ आलोचकों का भी कहना है कि सिद्दरमैया को पार्टी से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि देवेगौड़ा अपने बेटे को आगे बढ़ाना चाहते थे और सिद्दरमैया की विराट क्षवि के रहते हुए यह संभव नहीं था.

सिद्दरमैया ने 2006 में अपने सहयोगियों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया और दिसम्बर 2007 के उपचुनाव में सिद्दरमैया चमुंडेश्वरी विधानसभा के सदस्य चुन लिये गये.

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