क्या अशोक सिंघल के विचारों का मुसलमानीकरण हो रहा है?

पिछले चार दशक से मुसलमानों को पानी पी-पी कर कोसने वाले अशोक सिंघल उम्र के आखिरी पड़ाव में काफी आहत हैं. वह डरे हुए हैं कि भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जायेंगे. उनके हताशा का प्रमाण कल तब मिला जब उन्होंने भारत के हिंदुओं से अपील की कि वह पांच-पांच बच्चे पैदा करें.ashok-singhalafp

IRSHADUL HAQUE

विश्व हिंदू परिषद के कर्णधार अशोक सिंघल विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. पिछले कई दशकों से वह मुसलमानों की कथित बढ़ती संख्या पर भारतीय जनमानस को गुमराह करते रहे हैं और भारत में हिंदू-मुस्लिम एकता को भंग करने की कोई कोशिश नहीं छोड़ते. पहले वह मुसलमानों के बारे में यह प्रचार करते हुए नहीं थकते थे कि मुसलमान दर्जनों बच्चे पैदा करते हैं जिसके कारण उनकी संख्या देश में लगातार तेजी बढ़ रही है. लेकिन जब आंकड़े और तथ्य ने उनके इस दुष्प्रचार को बेनकाब कर दिया तो उन्होंने अपना पैतरा बदल लिया.

गुमराह करने वाले बयान

जनगणना रिपोर्टों पर पैनी निगाह रखने वाले जानते हैं कि भारत में उन तबकों की जनसंख्या अपेक्षाकृत अवसत से ज्यादा तेज गति से बढ़ रही है जिन तबकों में शिक्षा की कमी है. अनेक शोध अध्ययनों ने यह साबित किया है कि दलितों, अतिपिछड़ों और मुसलमानों के पिछड़े गरीब तबके में आबादी की वृद्धि का रुझान एक समान है. यानी जिस तबके में शिक्षा और संसाधन की कमी है वहां जनसंख्या वृद्धि दर अवसत से ज्यादा है, चाहे यह मुस्लिम समाज हो या दलित अतिपिछड़ा समाज. आंकड़ें यह भी बताते हैं कि मुसलमानों के आर्थिक और शौक्षणिक रूप से समृद्ध तबके और हिंदुओं के समृद्ध तबके में आबादी बढ़ने का रुझान एक समान है. अगर इन आंकड़ों के मुताबिक अगले हजार दो हजार साल में भी ऐसी कोई संभावना नहीं कि भारत में हिंदू अल्पसंख्यक हो जायेंगे.

पर यहां पर बहस का जो मुद्दा है वह है अशोक सिंघल के ताजा बयान का. सिंघल की यह अपील की हिंदू कम से कम पांच बच्चे पैदा करें, वर्ना वह भारत में अल्पसंख्यक बन के रह जायेंगे, दर असल यह बयान कुछ हिंदुओं को( सब को नहीं) उकसाने वाला है क्योंकि अधिकतर हिंदू ऐसे गुमराह करने वाली बातों पर भरोसा नहीं करते.

सिंघल के बयान के निहतार्थ

लेकिन सिंघल के ताजा बयान से कुछ और इशारे भी मिलते हैं. इसके लिए सिंघल के कुछ साल पहले के बयानों को समझना होगा. पहले सिंगल मुसलमानों पर आरोप लगाते थे कि वे ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं. इसके लिए वह उन्हें जी भर कोसते भी थे. उनके संगी प्रवीण तोगड़िया तो यहां तक कहते रहे हैं कि ज्यादा बच्चे पैदा करने कारण ही देश में गरीबी और बेरोजगारी है.

वह उदाहरण दे कर समझाते थे कि साइकिल के टायर के पंचर बनाने वाली दुकानों में ज्यादातर मुसलमा होते हैं क्योंकि वह अशिक्षित और गरीब हैं और उनके मां-बाप ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं.

यह सच है कि ज्यादातर मुस्लिम, दलित और अतिपछड़े समाज के लोग ही ऐसे कारोबार करते हैं क्योंकि उनमें शिक्षा और संसाधन की कमी है. पर क्या अशोक सिंघल हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह देकर हिंदुओं को गरीबी और संसाधनहीनता के जाल में तो नहीं फंसाना चाह रहे हैं.

सिंघल के इस बयान का दूसरा पहलू भी है. सिंघल ने पहले ऐसा दुष्प्रचार भी किया है कि कुरान में कहा गया है कि मुसलमानों ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करो. ऐसे में एक लाजिमी सवाल यह है कि क्या अशोक सिंघल वैचारिक रूप से मुसलमानों ( जो की तथ्यहीन है) के सिद्धांत को अपनाने के लिए हिंदुओं से अपील कर रहे हैं? क्या अपने जीवन के आखिरी पड़ाव में सिंघल का मुसलमानीकरण तो नहीं होता जा रहा है?

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