क्ले ईंट के प्रदूषण के खतरे के बाद अब बिहार में बढ़ रही है एएसी ब्लाॅक की मांग

प्रदूषण के बढ़ते स्तर तथा स्वास्थ्य पर इसके घातक प्रभाव को देखते हुए सरकार ने क्ले ब्रिक्स पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। क्ले ब्रिक्स कुल प्रदूषण में 15 फीसदी का योगदान देती हैं, जिनके चलते हवा की गुणवत्ता का स्तर गिर जाता है।

 

क्ले ब्रिक्स पर रोक लगाने के परिणामस्वरूप निर्माण कंपनियों तथा बिल्डरों पर दबाव बढ़ गया है। इस प्रतिबंध के बाद कई निर्माण परियोजनाओं का काम रुक गया है और लोग एएसी ब्लाॅक्स की ओर रुख कर रहे हैं।

यह उत्पाद निर्माण उद्योग में बदलाव लाएगा, तथा सामाजिक, जलवायु परिवर्तन एवं उर्जा की चुनौतियों के समाधान हेतू सरकार की विभिन्न पहलों में अपना योगदान देगा। एएसी ब्लाॅक का निर्माण फ्लाई ऐश (राख), सीमेंट, चूना, जिप्सम, पानी और एलुमिनियम (राइज़िंग एजेन्ट) से किया जाता है। ये ब्लाॅक  वज़न में हल्के होते हैं और बेहद प्रत्यास्थ एवं टिकाउ भी होते हैं।

नई स्वचालित जर्मन टेक्नोलाॅजी के साथ कृष व्हाईट ब्रिक्स सरकार द्वारा प्रदूषण कम करने के दृष्टिकोण में अपना योगदान देना चाहती है और इसीलिए कंपनी ने प्रदूषण रहित सामग्री से इस उत्पाद को बनाने की यह पहल की है। कंपनी बिहार और झारखण्ड में एएसी ब्लाॅक बनाने वाली पहली कंपनी है जिसकी उत्पादन क्षमता 500 क्युबिक मीटर प्रति दिन है।

कृष व्हाईट ब्रिक्स की योजनाओं पर बात करते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर श्री शशांक अग्रवाल ने कहा, ‘‘इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलाॅजी की बात करें तो बिहार तेज़ी से विकसित हो रहा है। क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं कीमत प्रतिस्पर्धी उत्पादों की मांग बढ़ रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एएसी ब्लाॅक आज भी पड़ौसी राज्यों से आयात किए जाते हैं, जिससे परियोजना की कुल लागत बढ़ जाती है। इसलिए हम बाज़ार में ऐसा उत्पाद उपलब्ध कराना चाहते हैं जो उपभोक्ताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ कीमतों पर उपलब्ध हो।’’

रैड ब्रिक्स (लाल ईंटों) की तुलना में एएसी की विशेषताएं 

ऽ    एएसी ब्लाॅक का गलनांक 2900 फारेनहाईट है और ये क्ले ब्रिक्स की तुलना में 10 गुना उष्मा सहन कर सकती हैं। ये उष्मा, ध्वनि, आग और कीटों के लिए प्रतिरोधी हैं। साथ ही ध्वनि को अवशोषित करने के गुण भी रखती हैं।
ऽ    एएसी आम ब्रिक्स से तीन गुना हल्की हैं, जिसके चलते इमारत पर भूकम्प का प्रभाव कई गुना कम हो जाता है।
ऽ    इन ब्रिक्स के इस्तेमाल से निर्माण कार्य की लागत कम हो जाती है, साथ ही निर्माण कार्य जल्दी हेाता है।
ऽ    यह उत्पाद पर्यावरण के लिए अनुकूल होने के साथ किफ़ायती है तथा पारम्परिक सामग्री जैसे काॅन्क्रीट, लकड़ी, ईंटों और पत्थर की तुलना में बेहतर है।

भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से विकसित होते देशों में से एक है और सरकार स्मार्ट शहरों का निर्माण कर रही है। ऐसे में देश के हर राज्य को ऐसी ब्रिक्स की ज़रूरत है जो रैड ब्रिक्स की तुलना में पर्यावरण के लिए ज़्यादा अनुकूल हों और साथ ही किफ़ायती भी हैं। कृष की व्हाईट ब्रिक्स इसी समस्या का समाधान हैं। इन एएसी ब्लाॅक्स का निर्माण स्वीडन में किया गया, जहां 1924 से इन ब्रिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। आगामी महीनों में कंपनी बिहार एवं झारखण्ड की निर्माण संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर है।

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