खुद को तीसमार खाँ मत समझो, हम से सीखो

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी अमितभ ठाकुर अमेरिका में पुलिस अधिकारी की हत्या पर अमेरिकियों को सिखा रहे हैं कि खुद को तीसमार खाँ समझने के बजाये भारतीय पुलिस से सबक ले.

अमेरिकी पुलिस: तीसमारी में गयी जान

अमेरिकी पुलिस: तीसमारी में गयी जान

आज की विश्व की सबसे बड़ी घटना के तौर पर अमेरिका के बॉस्टन में बम धमाका और उसके बाद की पुलिसिया कार्यवाही है. हम सभी जानते है कि सोमवार को बॉस्टन मैराथन के दौरान हुए धमाकों में तीन लोग मारे गए थे और 170 लोग घायल हो गए थे.

मामला अमेरिका का है, लिहाजा चीज़ें बड़ी तेजी से घट रही हैं. जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने सोमवार को ही बॉस्टन मैराथन के दौरान हुए धमाके के दो संदिग्धों की कई तस्वीरें जारी कर दी थी.

खबरों के अनुसार गुरुवार देर रात के घटनाक्रमों में कार का पीछा करने और फिर इस दौरान हुई गोलीबारी में एक संदिग्ध की मौत हो गई लेकिन दूसरा संदिग्ध फरार हो गया. पुलिस अपनी कार्यवाही में तेजी से लगी हुई है.

लेकिन जिस बात ने मेरा विशेष रूप से ध्यान खीचा है वह यह कि एक यूनिवर्सिटी कैम्पस में हुई इस कार्यवाही में एक पुलिस अधिकारी की भी मौत हुई जबकि इस दौरान एक अन्य पुलिसवाला गंभीर रूप से घायल हुआ.

भारतीय पुलिस की तरह चालाक बनो

मैं जब इन बातों की तुलना अपने देश की पुलिस से करता हूँ तो लगता है कि अमेरिका की पुलिस उतनी तेजतर्रार, चालाक और कामयाब नहीं है जितनी हमारे देश की पुलिस. वहाँ तो ना जाने कितने सालों में कोई एक पुलिस मुठभेड़ हुई होगी और उसमे भी एक पुलिस वाला मारा गया, दूसरा घायल हो गया.

इसके विपरीत हमारे देश की पुलिस तो ना जाने कितने सारे “सच्चे मुठभेड़ों” से रूबरू होती है पर इस तरह से तो पुलिस वालों की मौत नहीं हुआ करती. यदाकदा के मामले जाने दें तो कई मुठभेड़ों में पुलिसवालों को खरोंच तक नहीं लगते, भले बड़ी विपरीत स्थितियों में घंटों मुठभेड़ चले हों और सामने वाला कितना ही नामी-गिरामी अपराधी क्यों ना हो.

देखिये बुद्धिमान वह माना जाता है जो हर समय हर किसी से कुछ ना कुछ सीखना चाहता है, इसीलिए यदि अमेरिकी पुलिस का कोई समझदार अधिकारी मेरा यह पोस्ट पढ़ रहा हो तो मैं उसे यही राय दूँगा कि अपने आप को सबसे तीसमारखां समझने की भूल ना करते हुए वे भारत की पुलिस से वह तकनीक सीखें जिससे सफल पुलिस इनकाउंटर तो हुआ करें पर इस तरह हर बार पुलिसवालों की जान नहीं जाया करे.

मुझे विश्वास है कि यह सीख उन पुलिसवालों के बहुत काम आएगी.

अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के आईपीए अधिकारी हैं और फिलहाल लखनऊ में सेवारत हैं.

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