“खुद पे हँस ले यार” का हुआ लोकार्पण

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्त्वावधान में, मंगलवार को व्यंग्य लेखक ई0 बाँके बिहारी साव के व्यंग्य-नाटक “खुद पे हँस ले यार” का लोकार्पण, सम्मेलन सभागार में सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने किया।DSC_7296

इस अवसर पर अपना विचार व्यक्त करते हुए डा सुलभ ने कहा कि लेखक की लोकार्पित पुस्तक व्यंग्य-साहित्य में एक मूल्यवान कृति के रूप में रेखांकित किये जाने योग्य है। लेखक ने इस नाटक में, निर्दोष हास्य के माध्यम से एक मार्मिक व्यंग्य का संधान किया है, जो समाज की विद्रूपताओं पर न केवल गहरा आघात करता है, अपितु पारिवारिक-जीवन तथा संबंधों में आ रहे स्वार्थ-परक दोषों व उसके खोखलेपन की भी पहचान करता है। इस नाटक में लेखक ने यह बताने की चेष्टा की है कि मनुष्य को अपने जीवन को मूल्यवान बनाने के लिये स्वयं की मुर्खताओं की खोज करने तथा उस पर हँसने के लिये प्रस्तुत होना चाहिये। इस पुस्तक में हास्य और व्यंग्य तो है ही, जीवन के संदर्भ में दर्शन भी है और व्यापक संदेश भी।

इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत करते हुए, सम्मेलन के प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव ने कहा कि, साहित्य में व्यंग्य-लेखन का कार्य बहुत थोड़ा हुआ है। व्यंग्य नातक तो और भी कम लिखे गये हैं। लोकार्पित पुस्तक के लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से हिन्दी में व्यंग्य साहित्य को बहुत सीमा तक समृद्ध किया है।

वरिष्ठ कवि सत्यनारायण ने कहा कि, लोकार्पित पुस्तक के लेखक एक सधे हुए व्यंग्य-कार हैं। ये रचनाकार के रूप में और व्यक्ति के रूप में भी एक प्रियकर मनुष्य हैं।

सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा शंकर प्रसाद ने कहा कि यह व्यंग्य नाटक केवल पठनीय ही नहीं मंचनीय भी है। उन्होंने कहा कि साहित्य सम्मेलन के उत्क्रमित हो रहे मंच पर वे स्वयं इस नाटक का प्रथम मंचन करना चाहेंगे।

सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेन्द्र नाथ गुप्त, वरिष्ठ रंगकर्मी मिथिलेश सिंह, बलभद्र कल्याण, अरुण शाद्वल, डा शहनाज़ फ़ातिमी भगवती प्रसाद द्विवेदी, शायर आरपी घायल, डा मेहता नगेन्द्र सिंह, डा विनय कुमार विष्णुपुरी, अमीय नाथ चटर्जी, ॠषिकेश पाठक, प्रह्लाद शर्मा, पं गणेश झा, नीरव समदर्शी, लेखक बांके बिहारी साव, जय प्रकाश पुजारी, रीतेश परमार, प्रवीर पंकज, प्रभात धवन, कृष्ण कन्हैया, जय प्रकाश पुजारी तथा शंकर शरण मधुकर ने भी अपने उद्गार व्यक्त किये।

मंच का संचालन आचार्य आनंद किशोर शास्त्री ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन डा नागेश्वर यादव ने किया।

 

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