गठन के पांच सालों में मजाक बन कर रह गयी है एनआईए

पटना ब्लास्ट के बाद मेहर आलम का एनआईए के चंगुल से भागने-मिलने का खेल जितना हास्यस्पद है खुद एनआईए भी उतनी ही हास्स्पद हो के रह गयी है.

2009 में एनआई का गठन हुआ था

2009 में एनआई का गठन हुआ था

इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन

भारत सरकार ने आतंकवादी गतिविधियों की गुत्थी सुलझाने के तहत एक विशेष अधिनियम एनआईए एक्ट 2008 के तहत इस जांच एजेंसी का गठन किया था. 2009 से काम करने वाली इस एजेंसी ने लगभग पांच सालों में एक भी केस को सुलझा पाने में असफल रही है. अभी तक एनआईए 72 केसों पर काम कर रही है पर कोई भी केस सुलझा पाने में अभी तक वह नाकाम रही है.

72 केसेज, हासिल कुछ नहीं

हद तो यह है कि एनआईए ने इन 72 केसेज में से बमुश्किल 10 में चार्जशीट दाखिल करने में सफल रही है. असम के कुछ उग्रवादी मामलों के अलावा मालेगांव, मक्का मस्जिद, समझौता एक्सप्रेस और अजमेर शरीफ धमाकों में ही वह अभी तक चार्शीट दाखिल कर सकी है. वो भी तब जब इसमें ज्यादातर जांच पहले ही राज्य पुलिस पूरी कर चुकी थी. पुणो, हैदराबाद, दिल्ली की जामा मस्जिद और बोधगया धमाकों की जांच सीधे तौर पर एनआइए को सौंपी गई एजेंसी ने मीडिया के सामने बातों का खूब बतंगड़ भी बनाया. अपनी कामयाबी के किस्से भी अखबारों के पन्नों पर लिखवाये पर इनमें चार्जशीट दाखिल करना तो क्या कोई ठोस प्रगति भी नहीं हो पायी है.

30 अक्टूबर को मेहर के साथ एनआईए की टीम मुजफ्फरपुर के सिद्धार्थ लॉज में ठहरी थी. रात में वह पेशाब के बहाने निकला फिर नहीं आया. एनआईए ने सफाई देते हुए नोट में लिखा है कि चूंकि मेहर आलम को गिरफ्तार नहीं किया गया था इसलिए उसके फरार होने का कोई मामला ही नहीं बनता

करोड़ों रुपये के बजट वाले इस एजेंसी के पास तेज तर्रार आईपीएस अधिकारियों और राज्य सेवाओं के अधिकारियों समेत कुल 600 अधिकारियों की फौज है. दिल्ली में हेड ऑफिस के अलावा मुम्बई, हैदराबाद, कोची, गोवाहाटी और लखनऊ में इसके ब्रांच दफ्तर हैं.

पिछली 7 जुलाई को बोद्ध गया ब्लास्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थी. इसकी जांच की जिम्मेदारी भी एनआई ने ली. चार महीने बीत जाने के बावजूद इस केस में कई ऐसी प्रगति नहीं हुई है जिसे एनआईए गर्व के साथ देश से साझा कर सके. अगर आप एनआईए की वेबसाइट को खंगालें तो उस पर बोद्ध गया ब्लास्ट के बारे में जो जानकारियां स्क्रॉल करती हुई मिलेंगी उसमें लिखा है कि मौंक के ड्रेस में जिन संगदिग्धों के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं उसे आम जनता के लिए शेयर किये जा रहे हैं. जिन्हें भी इस संबंध में जानकारी मिले वो Phone No. 011-40623805
Mobile No. 08540848216, Email ID : sp10.nia@gov.in. पर साझा कर सकते हैं. जानकारी देने वालों को उचित इनाम भी दिया जायेगा.
जांच की प्रगति और इस मामले में एनआईए के पारम्परिक ढ़र्रे से काम करने के तरीके से बहुत उम्मीद भी नहीं जगती.

एनआईए के संबंध में एक विवादित मामला यह भी है कि सीबीआई, एटीएस के रहते हुए भी एनआईए के गठन का मकसद निश्चित तौर पर यह था कि आतंकवादी गतिविधियों की गुत्थियों को सुलझाने के लिए एक ऐसी एजेंसी हो जिसे इस मामले में विशेषज्ञता प्राप्त हो. पर कई मामले में विभिन्न राज्यों के एटीएस( महाराष्ट्र, गुजरात आदि) ने एनआईए से अच्छा परिणाम दिया है. जबकि एनआईए में देश के तेज तर्रार आईपीए अधिकारियों को तैनात किया गया है.

मेहर आलम पर एनआईए की सफाई

दरभंगा से मुजफ्फर आने के बाद जिस मेहर आलम के, एनआईए के हाथ से भाग खड़े होने की खबर मीडिया में आई थी उसके बारे में एनआईए ने सफाई दी है. 31 अक्टूबर को एनआईए ने अपने नोट में लिखा है कि मेहर आलम को बतौर गवाह बोद्ध गया विस्फोट मामले में पेश होने को कहा गया था. यह ध्यान देने की बात है कि मेहर को 23 अक्टूबर को यह नोटिस जारी की गयी थी. यानी पटना ब्लास्ट के 4 दिन पहले. बाद में वह एनआईए के समक्ष हाजिर हुआ. और उसी के बाद एनआईए की टीम कई जगहों पर छापेमारी में गयी.

एनआईए का कहना है कि 30 अक्टूबर को मेहर के साथ एनआईए की टीम मुजफ्फरपुर के सिद्धार्थ लॉज में ठहरी थी. रात में वह पेशाब के बहाने निकला फिर नहीं आया. एनआईए ने सफाई देते हुए नोट में लिखा है कि चूंकि मेहर आलम को गिरफ्तार नहीं किया गया था इसलिए उसके फरार होने का कोई मामला ही नहीं बनता. एनआईए ने मेहर को किसी भी मामले में आरोपी भी नहीं बनाया है.
जो भी एनआईए जो भी सफाई दे पर पिछले पांच सालों में उसको मिले 72 मामलों पर उसकी प्रगति बहुत उम्मीद नहीं जगाती.

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