गलत न थे तो आपकी बातों में इतनी बेबसी क्यों थी एसपी साहब?

अमानवीय सुलूक के आरोप में शेखपुरा के एसपी बाबू राम पर एफआईआर हो चुका है.मुकेश के गुप्तांग में डंडा ठूस कर अधमरा करने के आरोप के दूसरे दिन बाबू राम ने नौकरशाही डॉट इन से बात की थी. तब उनका अंदाज ही उन्हें कटघरे में खड़ा कर रहा था.लग रहा था कि वह बुरी तरह घिर चुके हैं. हम उनसे हुई बातचीत को हू-ब-हू आप तक रख रहे हैं
सम्पादक

घटना के दूसरे दिन शेखपुरा एसपी ने नौकरशाही डॉट इन से बात की थी. वह बहुत रक्षात्मक थे.उनकी आवाज में बेबसी थी, याचना के शब्द तो नहीं थे पर भाव कुछ ऐसे ही थे.

बाबू राम: अब तो करियर ही दाव पर है

किसी सवाल का जवाब देने के बजाये वह अपनी रक्षा में सवाल खड़े करते रहे.उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा-“ आप ही बताइए न हम लोग एक पुराने केस के अपराधी को क्यों मारेंगे? हां उसे अरेस्ट कर के लाया गया था.पूछताछ के क्रम में वह बीमार हो गया”.सवाल यह था कि पूछताछ का तरीका क्या था कि महज पूछताछ से वह बीमार हो गया? इस सवाल पर बाबू राम सकबका गये.जैसे उनके पास कोई जवाब न हो.फिर उन्होंने कहा, “शायद वह पहले से बीमार रहा हो”.

जब उन से यह पूछा गया कि उसे बे रहमी से मारा गया है, उसके गुप्तांग में डंडा ठूसने की बात सामने आई है? यह सवाल सुनते ही उनके जैसे होश ही उड़ गये.लेकिन दूसरे ही पल उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा- “ देखिए जब हमने उसे पटना भेजा तो उसके शरीर पर खरोच का एक निशान तक नहीं था. लगता है कोई हमारे खिलाफ शरारत कर रहा है”.

फिर उनसे जब यह पूछा गया कि जब आपने उसे(मुकेश को) अस्पताल भेजा उस समय उसके शरीर पर कोई खरोच नहीं था तो क्या आपकी पुलिस ने उसे रास्ते में पीटा, यानी बीमार हालत में? इस सवाल के जवाब में एसपी बाबू राम फिर चुप हो गये.उन्होंने इस बात का जवाब देने के बजाये सिर्फ इतना कहा कि- “देखिए मैं उसका बयान खुद लेने वाला हूं. अगर आप चाहें तो उससे बात कर लें. वह कुछ भी नहीं बतायेगा कि उसकी पिटाई हुई है”.

इस पर नौकरशाही डॉट इन ने उनसे पूछा कि वह पुलिस के डर से कुछ भी नहीं बोल रहा है.इतना सुनना था कि बाबू राम फिर खामोश हो गये. उन्होंने कुछ देर बाद कहा कि उसकी आंत का ऑप्रेशन हुआ है.वह कोई चोरी या डकैती का आरोपी नहीं है.हमने उसे नहीं मारा.हमारे खिलाफ कुछ लोग साजिश कर रहे हैं.

पुलिस जो पेशावराना तौर पर इंट्रोगेशन में महारत रखती है, इस घटना ने खुद एक आईपीएस अधिकारी को कटघरे में खड़ा कर दिया था. पटना के अस्पताल में मुकेश के साथ मौजूद पुलिस वाले मीडिया से बता रहे थे कि वह पेड़ से गिर पड़ा है.जबकि पुलिस कप्तान शेखपुरा में नौकरशाही डॉट इन को बता रहे थे कि पूछताछ के दौरान वह “अचानक बीमार” हो गया. पुलिस का विरोधाभाषी बयान संदेह को और मजबूत कर रहा था.

आज शेखपुरा के एसपी बाबू राम पर इस मामले में नामजद एफआईआर हो चुका है.जांच चल रही है.पर सबसे गंभीर सवाल यह है कि पुलिस अभियुक्तों के साथ गैरइनसानी बरताव कब तक करती रहेगी. क्या हमारा समाज पुलिस को अपना रक्षक और सहयोगी मानने की कल्पना ऐसे में कभी करेगा.

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