चुनाव प्रचार से रोका, तो दीदी ने कर दिया खेला

चुनाव प्रचार से रोका, तो दीदी ने कर दिया खेला

बंगाल में भाजपा का दांव उल्टा पड़ गया। ममता को प्रचार से रोका, तो वे गांधी प्रतिमा के नीचे अकेली मौन बैठ गईं। मौन भी बोलता है। बंगाल में दो बातों की चर्चा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के सारे नेताओं के ममता बनर्जी पर हिंसा भड़काने के आरोप और कार्रवाई की मांग के बाद चुनाव आयोग ने ममता को 24 घंटे तक प्रचार करने पर रोक लगा दी।

ममता ने चुनाव प्रचार से रोके जाने का जवाब गांधी की प्रतिमा के नीचे मौन रहकर दिया। उनका मौन अनेक नेताओं के घंटों भाषण पर भारी पड़ा। जो लोग सोचते थे कि उन्हें चुनाव प्रचार से रोक देने पर वे हताश हो जाएंगी, जनता से 24 घंटे के लिए कट जाएंगी और इससे तृणमूल को नुकसान होगा, यह सब उल्टा पड़ गया।

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पहली बात, दीदी ने फिर दिखाया कि वे हमले से घबरानेवाली नहीं हैं। चुनाव से पहले कई तृणमूल नेताओं पर ईडी के छापे पड़े। लेकिन वे दबी नहीं। अब भाजपा के कहने पर चुनाव आयोग ने उन्हें प्रचार से रोका, तो इसका भी जवाब उन्होंने नायाब तरीके से दिया, जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा।

दूसरी बात, वे गांधी की प्रतिमा के नीचे मौन बैठीं। मौन भी बोलता है। मौन रहकर उन्होंने पूरे बंगाल में संदेश दिया कि वे किस तरह अकेली केंद्र की तानाशाही का मुकाबला कर रही हैं। तमिलनाडु से उन्हें समर्थन भी मिला। वहां डीएमके के सबसे बड़े नेता स्तालीन ने ममता को केंद्र की तानाशाही के खिलाफ समर्थन दिया। इस तरह दीदी ने न सिर्फ बंगाल बल्कि देशभर में संदेश दिया कि वे भाजपा को रोकने के लिए सबसे मजबूती से लड़ रही हैं।

तीसरी बात, गांधी की प्रतिमा के नीचे ममता ने अकेले मौन बैठकर अपने लिए खूब सहानुभूति भी बटोरी। आज सोशल मीडिया पर ब्लैक डे फॉर डेमोक्रेसी, ममता बनर्जी ट्रेंड करता रहा।

ममता ने जिस तरह सजा को भी अपने संघर्ष को सामने लाने का माध्यम बना दिया, उससे लगता है अब भाजपा ऐसी सजा की मांग करने से पहले कई बार सोचेगी।

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