जांच एजेंसियों के नियंत्रण पर सरकार जवाब दे

सरकारी नियंत्रण समाप्त किये जाने सम्बंधी पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने यूपी सरकार से आठ सप्ताह में अपना विस्तृत प्रतिशपथ पत्र दायर करने को कहा है.High-Court-Lucknow

अदालत ने यह उत्तर प्रदेश सरकार को यह आदेश आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन द्वारा उत्तर प्रदेश के विभिन्न अन्वेषण एजेंसियों की जांच प्रक्रिया में सरकारी नियंत्रण के विरुद्ध दायर किया था.

चीफ जस्टिस शिव कीर्ति सिंह और जस्टिस डी के अरोड़ा की बेंच ने आदेशित किया हे कि सरकार अपने जवाब में याचिका के उस हिस्से पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करे जिसमे यह प्रार्थना की गयी है कि इन जांच एजेंसी, जिन्हें याचिका में श्रेष्ठ अन्वेषण एजेंसी कहा गया है, को अपनी जांच समाप्त करने के बाद राज्य सरकार से अनुमति लेने के बजाय सीधे कोर्ट में अपना आरोपपत्र दायर करने का अधिकार मिले.

अमिताभ ने अपनी बहस में कहा कि सतर्कता अधिष्ठान, सीबी-सीआईडी, ईओडब्ल्यू एसआईबी को-ऑपरेटिव तथा एसीओ अपराधों का अन्वेषण और जांच दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार करते हैं, जिसमे पूरा दायित्व और अधिकार अन्वेषण अधिकारी और उसके वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हैं. इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में जांच शासन को सौंपी जाती है और वे ही इन पर अंतिम निर्णय करते हैं.

राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने कोर्ट को बताया कि दिसंबर 2012 में डीजी, ईओडब्ल्यू द्वारा विवेचना के बाद अपनी रिपोर्ट सीधे कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति मांगी गयी है जिस पर शासन विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि शासन याचीगण द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर सकारात्मक ढंग से विचार करेगा.

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