जांच यहां से शुरू कीजिए

पटना में रावण दहन हादसे की जांच जरूरी सिर्फ इसलिए नहीं कि हम सबक सीख सकें. जरूरी इसलिए भी है कि हम अफवाहबाज़ों को सबक सिखा सकें.

मौका ए हादसा: फोटो साभार दैनिक जागरण

मौका ए हादसा: फोटो साभार दैनिक जागरण

नौकरशाही डेस्क

रावण दहन के बाद पटना में हुए दर्दनाक हादसे की जांच गृहसचिव के स्तर पर जारी है. रावण दहन के बाद मची भगदड़ में 34 लोगों की जान चली गयी.जाहिर है सरकार अपने स्तर पर जांच कर रही है. लेकिन गांधी मैदान की जिस जगह पर हादसा हुआ उस प्वांयट पर मौजूद पुलिस अफसरों और पुलिसकर्मियों से जांच शुरू की जाये तो कई चौकाने वाले फैक्ट्स सामने आयेंगे.

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पुलिस दस्तावेज से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार रामगुलाम चौराहे के सामने जो भगदड़ मची उस प्वाइंट पर सीडीपीओ बबिता कुमारी और दरोगा गौतम कुमार को तैनात किया गया था . निश्चित तौर पर इन दो अफसरों को घटना की पूरी और सटीक जानकारी होनी चाहिए.

अभी तक जो खबरें आ रही हैं उसके अनुसार जांच दल पीएमसीएच में घायलों से मिला है. उनकी रिपोर्ट दर्ज की गयी है. लेकिन भीड़ का शिकार बने लोगों से जानकारी और जानकारी के स्रोत तो मिल सकते हैं पर फैक्ट्स भी मिल जायें यह जरूरी नहीं. इसलिए जांच दल अपनी जांच को रामगुलाम चौक पर लगाये गये पुलिस अफसरान से भी पूछे. चूंकि यहां सीडीपीओ बिबिता कुमारी और दारोगा गौतम कुमार खुद मौजूद थे इसलिए उन्होंने निश्चित तौर पर अपनी आंखों से हादसा होते देखा होगा. बिजली का तार तूटने और इसस क्रंट लगने की अफवाह भी यहीं से उड़ी. यह संभव है कि अनियंत्रित भीड़ के सामने ये दोनों अफसर और उनके सहयोगी पुलिसकर्मी बेबस रहे होंगे, पर हादसा हुआ तो यहीं.

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ड्रायुटी चार्ट के मुताबिक रामगुलाम चौक से महज 15 मीटर के फासले पर ट्विन टावर है. इस प्वाइंट पर भी दो पुलिस अफसरान, कुछ पुलिसकर्मियों के संग तैनात किये गये थे. यहां पर सीडीपोओ आरती कुमार खुद मोर्चा संभाल रही थीं. दारोगा गौतम कुमार इन दोनों प्वाइंट यानी रामगुलाम चौक और ट्विन टावर के बीच सक्रिये थे. इस प्रकार सीडीपीओ बिबिता कुमारी, सीडीपीओ आरती कुमारी और दारोगा गौतम कुमार इस दर्दनाक हादसे के चश्मदीद रहे होंगे.

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हालांकि आश्वासन दिया है कि सरकार जांच करके तह तक जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. शायद सरकार किसी नतीजे पर पहुंचे. पर हमारे सामने 2012 के छठ के अवसर पर हुए दर्दनाक हादसे की काली परछाई भी है. तब 18 लोगों की जानें गयी थी. ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार और शासन ने उस घटना से कुछ सबक सीखा? उस घटना में भी यह बात सामने आयी थी कि अफवाहबाजों ने अपनी करतूत दिखायी थी. उसकी जांच भी की गयी. क्या उस जांच का कोई नतीजा सामने आया? इस सवाल का जवाब भी दिया जाना चाहिए. अगर नहीं, तो सरकार की जांच के बेनतीजा मंशा पर संदेह लाजिमी है.

अब जल्द ही हम पटना में आने वाले छठ के अवसर पर लाखों व्रतियों की भीड़ का सामना करेंगे. क्या सरकार उस समय तक किसी नतीजे पर पहुंच चुकी होगी?

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