‘जारी रहेगी व्यवस्था परिवर्तन की जंग’

मूलनिवासी संघ ने सोमवार को पटना में ‘मूलनिवासी महापुरुषों का जीवनसंघर्ष का मिशन- व्यवस्था परिवर्तन’ विषय पर विचार गोष्ठि का आयोजन किया.

मूलनिवासी संघ के नेता व प्रख्यात चिकित्सक राजवी कुमार ने कहा कि बहुजन समाज के महापुरुष हमारे प्रेरणास्रोत हैं और उन्हीं के आदर्शों पर चल कर हम व्यवस्था परिवर्तन के सपने को साकार कर सकते हैं.उन्होंने कहा कि ब्रह्मणवादी व्यस्था ने हमारे महापुरुषों के योगदान को दबाने की पूरी कोशिश की है लेकिन अब मूलनिवासियों में जागरूकता आई है इसलिए हमारे महापुरुषों के योगदान को अब और दबाया नहीं जा सकता.

मूलनिवासी संघ ने संत रविदास, शहीद जगदेव प्रसाद, दशरथ मांझी, पेरियार रामास्वामी की जयंती व स्मृति दिवस के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया था.

इस अवसर पर उमेश रजक ने कहा कि जिस ब्रह्मणवाद ने संत रविदास के सिद्धांतों का एक समय में विरोध किया और जिन्हें हर तरह से प्रताड़ित किया अब वही समाज उनकी जयंती मना रहा है इसका मतलब यह नहीं कि उस समाज में अचानक उनके प्रति सम्मान जागृत हो गया है बल्कि सच्चाई यह है कि वह रविदास के आदर्शों की धार को अब बी कुंद करने में लगे हैं और उन के नाम का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में हैं. उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में अपने शत्रुओं के षडयंत्र को समझने की जरूरत है.

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता अशोक यादव ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को पिछड़ी जातियों के राजनेता दिशाहीन करने में लगे हैं इसलिए वैसे नेताओं से सावधान रहने की जरूत है.
गोष्ठि को एडवोकेट मालादास ने संबोधित करते हुए कहा कि कुछ शक्तियां पिछड़ों दलितों के बीच फूट डालने में लगी है जिससे सावधान रहने की जरूत है.

इस अवसर पर बीएन विश्वकर्मा ने कहा कि पिछले दिनों आशीष नंदी ने दिलतों-पिछड़ों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करके अपनी दोहरी मानसिकता का परिचय दिया. उनके खिलाफ मुकदमा भी दायर किया गया लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ और आज उन्हें जमानत मिल गयी है. यह चिंता की बात है.

इस अवसर पर पसमांदा महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इर्शादुल हक ने भी अपने विचार रखे.

गोष्ठि का संचालन करते हुए मनीष रंजन ने कहा कि संत रविदास, दशरथ मांझी और शहीद जगदेव प्रसाद सरीखे महापुरुषों ने व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में अपना सबकुछ निछावर कर दिया. ऐसे में मूलनिवासियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने महापुरषों के आर्दशों को आत्मसात करते हुए उनके बताये रास्ते पर चलें और पिछड़ों दलितों को संगठित करे.

गोष्ठि में कौशल कुमार यादव, अमित पासवान, शिवलखन राम, भूपेंद्र सिंह समेत अनेक वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे.

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